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अयोध्या में ऐतिहासिक पल! राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहरा नया धर्म ध्वज, देखें अलौकिक तस्वीरें

अयोध्या में ऐतिहासिक पल! राम मंदिर के 161 फीट ऊंचे शिखर पर फहरा नया धर्म ध्वज, देखें अलौकिक तस्वीरें

 अयोध्या. रामनगरी से बड़ी और गौरवशाली खबर सामने आ रही है. श्रावण मास के पावन शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के शुभ अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य शिखर पर नवीन धर्मध्वज का विधिवत पूजन के साथ ध्वजारोहण किया गया.

जैसे ही मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर केसरिया धर्मध्वज लहराया, पूरा राम मंदिर परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा. दूर से ही शिखर पर लहराता यह नया ध्वज श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बन गया है.

ट्रस्ट ने जारी की तस्वीरें

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आज नवीन धर्मध्वज की भव्य तस्वीरें और ड्रोन वीडियो जारी किए हैं. ट्रस्ट के अनुसार, यह ध्वज सनातन धर्म, विजय और मर्यादा का प्रतीक है.

मंदिर के शिखर पर स्थापित यह ध्वज विशेष तकनीक और सैन्य-ग्रेड पैराशूट कपड़े से बनाया गया है, ताकि तेज हवा और मौसम में भी इसकी चमक और मजबूती बनी रहे. ध्वज पर सूर्यवंश का प्रतीक – सूर्य, ओम और कोविदार का चिन्ह अंकित है.

श्रद्धालुओं में उत्साह

धर्मध्वज फहराए जाने की तस्वीरें सामने आते ही देशभर के रामभक्तों में जबरदस्त उत्साह है. सोशल मीडिया पर #DharmDhwaj और #RamMandir ट्रेंड करने लगा है.

बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अलौकिक दृश्य के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं. ट्रस्ट के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि मुख्य शिखर के साथ-साथ परकोटे के अन्य मंदिरों पर भी इसी तरह के धर्मध्वज स्थापित किए गए हैं.

उन्होंने बताया कि यह मंदिर निर्माण के पूर्णता की ओर बढ़ते एक और ऐतिहासिक पड़ाव को दर्शाता है.

वाराणसी का चर्चित 27 किलो चांदी लूटकांड मामला, गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच दो अंतरराज्यीय बदमाश गिरफ्तार

वाराणसी का चर्चित 27 किलो चांदी लूटकांड मामला, गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच दो अंतरराज्यीय बदमाश गिरफ्तार

 वाराणसी। जिले के चर्चित 27 किलो चांदी लूटकांड में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए अंतरराज्यीय गिरोह के दो शातिर बदमाशों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया। कमिश्नरेट वाराणसी की एसओजी, थाना चौक और थाना लंका की संयुक्त टीम ने लौटूबीर पुलिया के पास घेराबंदी की। खुद को घिरा देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई में दोनों बदमाश घायल हो गए और मौके से गिरफ्तार कर लिए गए।

मुठभेड़ में घायल बदमाशों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद अली उर्फ शाबिर हसन (55) पुत्र हाजी मुस्कीन उर्फ महमूद अली, निवासी रायसेन, वर्तमान पता ईरानी बस्ती, अमन कॉलोनी करोध, थाना निशादपुरा, जिला भोपाल (मध्य प्रदेश) तथा हाल पता इदबारा, पोस्ट कोतवाली पिपारिया, जिला होशंगाबाद (नर्मदापुरम), और माशाअल्लाह (40) पुत्र अनवर अली, निवासी पिपारिया, थाना पंचमढ़ी रोड, जिला नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश) के रूप में हुई है।

नकदी, अवैध हथियार और चांदी बरामद

पुलिस ने दोनों के कब्जे से 4 किलो वजन की चांदी की चार बटिया, 15,020 रुपये नकद, दो अवैध .315 बोर तमंचे, चार जिंदा कारतूस और तीन खोखा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस का कहना है कि बरामद चांदी 17 जुलाई को चौक थाना क्षेत्र में हुई लूट की घटना से संबंधित है।

गोविंदपुरा मोड़ के पास हुई थी वारदात

गौरतलब है कि हेमा ज्वेलर्स से 27 किलो 327 ग्राम चांदी महालक्ष्मी ज्वेलर्स ले जाते  समय गोविंदपुरा मोड़ के पास बदमाशों ने कर्मचारियों से चांदी लूट ली थी। घटना के बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों तक पहुंच बनाई।

मुख्य आरोपी पर दर्ज हैं गंभीर मुकदमे

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी मोहम्मद अली उर्फ शाबिर हसन एक शातिर अंतरराज्यीय अपराधी है। उसके खिलाफ वाराणसी, दिल्ली, जयपुर सहित विभिन्न राज्यों में हत्या के प्रयास, लूट, चोरी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों के कई मुकदमे दर्ज हैं।

दोनों आरोपियों को घायल अवस्था में बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और लूटी गई बाकी चांदी की बरामदगी के लिए अभियान चला रही है।

दिल्लीवासियों को बड़ी सौगात! 9.62 करोड़ से बनेगा नया स्काईवॉक, नवंबर में होगा शुरू

दिल्लीवासियों को बड़ी सौगात! 9.62 करोड़ से बनेगा नया स्काईवॉक, नवंबर में होगा शुरू

 दिल्ली - दिल्ली के मधुबन चौक पर राहगीरों की सुविधा और सड़क पार करने में सुरक्षा बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) की ओर से Skywalk-FOB का निर्माण कराया जा रहा है। करीब 9.62 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहा यह स्काईवॉक-फुटओवर ब्रिज नवंबर 2026 से आम लोगों के लिए खोलने की योजना है। यह Skywalk-FOB आउटर रिंग रोड स्थित मधुबन चौक पर बनाया जा रहा है। इसके तैयार होने के बाद पैदल यात्रियों को व्यस्त सड़क और चौराहे पर वाहनों के बीच से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। Skywalk-FOB को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि यह पितमपुरा मेट्रो स्टेशन, मधुबन चौक मेट्रो स्टेशन और रोहिणी जिला अदालत को आपस में जोड़ेगा। इससे मेट्रो यात्रियों, अदालत आने वाले लोगों और आसपास के निवासियों को आवाजाही में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

30 नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य

सूत्रों के मुताबिक, मधुबन चौक पर बन रहे Skywalk-FOB को 30 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके शुरू होने के बाद पैदल यात्रियों को आउटर रिंग रोड जैसी व्यस्त सड़क को सीधे सड़क स्तर पर पार करने की जरूरत नहीं होगी। Skywalk-FOB के जरिए यात्रियों को सड़क के ऊपर से सुरक्षित तरीके से आवाजाही की सुविधा मिलेगी। इससे व्यस्त मार्ग पर पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच टकराव का जोखिम भी कम होने की उम्मीद है।

दुर्घटनाओं का जोखिम होगा कम

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, मधुबन चौक पर Skywalk-FOB बनने से पैदल यात्रियों और वाहनों के बीच टकराव और दुर्घटनाओं का जोखिम कम करने में मदद मिलेगी। व्यस्त आउटर रिंग रोड को सड़क स्तर पर पार करने की जरूरत नहीं होने से पैदल यात्रियों की आवाजाही अधिक सुरक्षित हो सकेगी। अधिकारी ने बताया कि इस परियोजना से मेट्रो स्टेशनों और रोहिणी जिला अदालत के बीच लास्ट-माइल कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। इससे रोजाना मेट्रो से सफर करने वाले यात्रियों, अदालत आने वाले लोगों और आसपास के आम नागरिकों को आवाजाही में सुविधा मिलेगी।

मेट्रो से कनेक्टिविटी होगी बेहतर

वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, PWD की इस परियोजना से मधुबन चौक क्षेत्र में पैदल यातायात को अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही, आउटर रिंग रोड पर वाहनों और पैदल यात्रियों के बीच बेहतर पृथक्करण सुनिश्चित किया जा सकेगा। Skywalk-FOB के जरिए मेट्रो स्टेशनों और रोहिणी जिला अदालत के बीच पैदल आवाजाही आसान होगी। इससे क्षेत्र की लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत होने के साथ मेट्रो यात्रियों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।

 

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान, अगले दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

 भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं नीतिगत सुधारों के चलते अगले दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी सरकार की ओर से जारी ताजा डेटा में सामने आई। भारत रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ऐसे अवसर पर मनाया जा रहा है, जब देश का अंतरिक्ष इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या इस साल अगस्त तक बढ़कर करीब 440 हो गई है, जो 2014 में सिर्फ 1 थी।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश लगभग छह गुना बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। अकेले 2026 में अब तक 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके हैं। इनमें 18 स्टार्टअप हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए अनुमति मिली है।

भारत ने 2020 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था। इससे उपग्रहों, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी संभव हुई। इसे भारत के व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को और बढ़ाया। इस नीति में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया।

इसरो की वाणिज्यिक शाखा एनएसआईएल लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएं उपलब्ध कराती है और इसरो की तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाती है। एनएसआईएल का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में 321.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बढ़ते व्यावसायीकरण को दर्शाता है। इन-स्पेस सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम बनाता है। 31 जनवरी 2026 तक इसने उद्योगों और स्टार्टअप्स को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में मदद की।

भारत को रक्षा क्षेत्र में बनना होगा आत्मनिर्भर, किसी देश पर निर्भर नहीं रह सकते: राजनाथ सिंह

भारत को रक्षा क्षेत्र में बनना होगा आत्मनिर्भर, किसी देश पर निर्भर नहीं रह सकते: राजनाथ सिंह

 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि अब हमारी सोच यह नहीं होनी चाहिए कि भारत को दुनिया से क्या खरीदना है। हमारी सोच यह होनी चाहिए कि दुनिया भारत से क्या खरीदना चाहती है। स्वदेशी हथियार हमारे लिए कितने जरूरी हैं, इसका उदाहरण हमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिखा। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुनिया ने भारत की स्वदेशी हथियार प्रणालियों की क्षमता देखी।

राजनाथ सिंह ने यह बात रविवार को पांच रक्षा प्रोजेक्टों का शिलान्यास करने के दौरान कहीं। जिनका शिलान्यास किया गया वे पश्चिम बंगाल स्थित जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड की 5 नई फैसिलिटी हैं। जीआरएसई देश के प्रमुख युद्धपोत निर्माण प्रतिष्ठानों में शामिल है। जीआरएसई के पास 800 से अधिक जहाजों के निर्माण का अनुभव है। यहां राजनाथ सिंह ने कहा, हमारा लक्ष्य होना चाहिए कि क्वालिटी ऐसी कि दुनिया भरोसा करे, कीमत ऐसी कि दुनिया चुने और डिलीवरी ऐसी कि दुनिया बार-बार ऑडर करे।

उन्होंने बताया जीआरएसई के पास तकनीकी जानकारी है, कुशल कार्यबल है और अब विस्तारित क्षमता भी होगी। आपको इसका पूरा उपयोग करना होगा। आप अभी नौसेना के ऑर्डर के साथ-साथ, एक जर्मन कंपनी के लिए 12 मालवाहक जहाज बना रहे हैं। यह बिल्कुल हमारी मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड, विजन के अनुरूप है। जैसे-जैसे आपकी क्षमता बढ़ेगी, आपको घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही बाजारों में अधिक आक्रामक बोली लगानी होगी।

राजनाथ सिंह ने कहा, “आगे भी, रक्षा मंत्रालय के साथ, हमारी प्रयोगशालाएं, हमारे सार्वजनिक उपक्रम, और निजी हितधारक मिलकर, अपनी सेनाओं को स्वदेशी प्लेटफॉर्म से लैस करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। हमने यह साबित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल एक नीति नहीं है। आत्मनिर्भरता, युद्धक्षेत्र क्षमता का गुणक है। और इस पहल में जीआरएसई, तथा यंत्र इंडिया लिमिटेड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाली है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि हम हिंद महासागर क्षेत्र में जहाज मरम्मत और ओवरहॉल का केंद्र बन जाएं, तो विदेशी मुद्रा की बचत के साथ-साथ, हजारों रोजगार पैदा होंगे। आज भी हमारे बनाए युद्धपोत, दुनिया के संघर्ष क्षेत्रों से होकर हमारी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने में मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम रक्षा क्षेत्र में किसी भी देश पर निर्भर नहीं रह सकते। हमारी अपनी स्वदेशी कंपनियों और अनुसंधान संस्थानों को ही इस क्षेत्र में पूरी तरह प्रभुत्व हासिल करना होगा। और आज के ये पांचों परियोजनाएं उसी रणनीतिक स्वायत्तता को प्रतिबिंबित कर रहे हैं।

राजनाथ सिंह ने बताया, “आज हम, लगभग साढ़े तीन हजार करोड़ रुपयों की लागत वाली पांच अत्यंत महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमि पूजन और शिलान्यास कर रहे हैं। इनमें जीआरएसई की तीन नई जहाज निर्माण सुविधाएं – रायचक शिपयार्ड, टिम्बर पोंड हावड़ा जहाज निर्माण सुविधा और दामोदर कॉम्प्लेक्स जहाज निर्माण सुविधा शामिल हैं। इसके साथ ही यंत्र इंडिया लिमिटेड की दो अत्याधुनिक धातुकर्म सुविधाओं, 3,000 टन क्षमता वाली हाइड्रोलिक ओपन डाई फोर्जिंग प्रेस और रेडियल फोर्जिंग प्लांट, का भी शिलान्यास हो रहा है। ये पांचों परियोजनाएं आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की भावना को बल देने वाली हैं।”

उन्होंने कहा कि जीआरएसई और यंत्र इंडिया लिमिटेड जैसे संस्थान, इस बात के प्रमाण हैं, कि बंगाल का औद्योगिक आधार फिर से मजबूत हो रहा है। यहां से शुरू होने वाले ये परियोजनाएं, रक्षा उत्पादन को तो बढ़ाएंगे ही, साथ ही साथ एमएसएमई, संबद्ध उद्योगों और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगे। एक तरह से देखें, तो ये परियोजनाएं, बंगाल की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के, नए अध्याय के रूप में सामने आने वाले हैं।

मध्य प्रदेश को जैव विविधता संरक्षण के लिए मोदी सरकार की अतिरिक्त मदद, दिए 32.73 लाख रुपये

मध्य प्रदेश को जैव विविधता संरक्षण के लिए मोदी सरकार की अतिरिक्त मदद, दिए 32.73 लाख रुपये

 भोपाल। मध्य प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण, स्थानीय जैव संसाधनों के दस्तावेजीकरण और उनसे जुड़े समुदायों की आजीविका को मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने पहुंच एवं लाभ-साझाकरण तंत्र के तहत मध्य प्रदेश को 32.73 लाख रुपये आवंटित किए हैं।

उल्लेखनीय है कि देशभर में जारी 2.80 करोड़ रुपये की राशि में मध्य प्रदेश को मिलने वाला यह हिस्सा उसे प्रमुख प्राप्तकर्ता राज्यों में शामिल करता है। यह राशि राज्य में जैव विविधता संरक्षण और उससे जुड़े स्थानीय समुदायों के हित में विभिन्न गतिविधियों पर खर्च की जाएगी।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने भारत के जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न होने वाले लाभों को साझा करने के उद्देश्य से पहुंच एवं लाभ-साझाकरण यानी एबीएस तंत्र के तहत कुल 2.82 करोड़ रुपये वितरित किए हैं। इसमें से 2.80 करोड़ रुपये 27 राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों को जारी किए गए हैं। इसके अतिरिक्त 2.01 लाख रुपये भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक को दिए जा रहे हैं।

मध्य प्रदेश को आवंटित 32.73 लाख रुपये इस पूरी राशि में तीसरा सबसे बड़ा राज्यवार हिस्सा है। गुजरात को 44.59 लाख रुपये और पश्चिम बंगाल को 41.24 लाख रुपये मिले हैं। मध्य प्रदेश के बाद ओडिशा को 32.57 लाख रुपये, बिहार को 30.86 लाख रुपये और छत्तीसगढ़ को 16.54 लाख रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे स्पष्ट है कि जैविक संसाधनों और बागवानी फसलों की विविधता के लिहाज से मध्य प्रदेश का महत्व राष्ट्रीय स्तर पर भी रेखांकित हुआ है।

इस संबंध में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) की ओर से अधिकारिक तौर पर कहा गया है कि यह राज्य की जैव विविधता को संरक्षित करने और स्थानीय स्तर पर उसके सतत उपयोग की दिशा में संसाधन उपलब्ध कराने की पहल है।

फूलगोभी, मिर्च, भिंडी और टमाटर से जुड़े संसाधनों से आया लाभ

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को मेसर्स एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड, पूर्व में मेसर्स यूपीएल लिमिटेड, से एबीएस के तहत 2.94 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। यह राशि फूलगोभी की आठ संकर किस्मों, मिर्च की पांच संकर किस्मों, भिंडी की पांच संकर किस्मों और टमाटर की छह संकर किस्मों से जुड़े आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से संबंधित है।

इस मामले में जैविक संसाधनों तक पहुंच किसी अन्य कंपनी के अधिग्रहण के माध्यम से हुई थी। ऐसे में किसानों, समुदायों अथवा किसी एक पहचान योग्य भौगोलिक स्रोत को प्रत्यक्ष लाभार्थी के रूप में चिन्हित करना संभव नहीं था। इसी कारण राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने ऐसे मामलों में लाभ-साझाकरण राशि के वितरण और उपयोग के लिए विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर एक कार्यप्रणाली विकसित की। प्राधिकरण द्वारा इसे अनुमोदित किए जाने के बाद संबंधित राज्यों में बागवानी फसलों की खेती को ध्यान में रखते हुए राशि का वितरण किया गया।

मध्य प्रदेश में किन कामों पर खर्च होगी राशि

राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेशों को जारी राशि का उपयोग जन जैव विविधता रजिस्टरों के दस्तावेजीकरण एवं अद्यतन, जैव विविधता के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण, खराब हो चुके पारिस्थितिक तंत्रों के पुनर्स्थापन तथा जैव विविधता विरासत स्थलों को मजबूत करने जैसे कार्यों में किया जाना है।

इसके साथ ही जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता बढ़ाने और स्थानीय समुदायों की आजीविका के संवर्धन पर भी राशि खर्च की जाएगी। मध्य प्रदेश जैसे बड़े और जैव विविधता की दृष्टि से समृद्ध राज्य के लिए यह राशि स्थानीय स्तर पर जैव संसाधनों के संरक्षण और उनके वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

प्राप्त राशि का उपयोग करने के बाद संबंधित संस्थाओं को एक वर्ष के भीतर उपयोग प्रमाण पत्र और व्यय विवरण प्रस्तुत करना होगा। इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त आर्थिक लाभ संरक्षण कार्यों तक पहुंचे और उसका उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही हो।

अनुसंधान संस्थानों को भी लाभ

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण को सुमितोमो केमिकल इंडिया लिमिटेड, मुंबई, पूर्व में एक्सेल क्रॉप केयर, से दो सूक्ष्मजीव उपभेदों के अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के लिए 7.15 लाख रुपये एबीएस राशि के रूप में प्राप्त हुए। इनमें स्यूडोमोनास फ्लोरेसेंस और ट्राइकोडर्मा हारजियानम के संबंधित उपभेद शामिल हैं, जिन्हें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान, कर्नाटक से प्राप्त किया गया था।

चूंकि ये जैविक संसाधन एक सार्वजनिक अनुसंधान संस्थान से प्राप्त हुए थे, इसलिए नियमों के अनुसार एबीएस राशि का 30 प्रतिशत यानी 2.01 लाख रुपये भारतीय बागवानी अनुसंधान संस्थान को दिया जा रहा है। इस राशि का उपयोग जैविक संसाधनों के भंडारों के रखरखाव, अनुसंधान, जैव विविधता सर्वेक्षण, वर्गीकरण एवं संरक्षण संबंधी क्षमता विकास तथा जैव संसाधनों और उनसे जुड़े वन्य जीवों के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण के लिए किया जाएगा।

संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच बनेगा संतुलन

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण के अनुसार अब तक कुल 185 करोड़ रुपये की एबीएस राशि जारी की जा चुकी है। इसका उद्देश्य भारत के जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से उत्पन्न आर्थिक लाभ को जैव विविधता संरक्षण, उसके सतत उपयोग तथा किसानों, स्थानीय समुदायों और संरक्षण से जुड़े अन्य लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ना है।मध्य प्रदेश को मिला 32.73 लाख रुपये का आवंटन इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा है।

बंगाल की खाड़ी में समंदर में समाया मालवाहक जहाज, 24 नाविक सवार; रेस्क्यू जारी

बंगाल की खाड़ी में समंदर में समाया मालवाहक जहाज, 24 नाविक सवार; रेस्क्यू जारी

 नई दिल्ली। ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 नॉटिकल मील दूर बंगाल की खाड़ी में शनिवार को पनामा के झंडे वाला एक मालवाहक जहाज डूब गया। अधिकारियों के मुताबिक, जहाज पर 24 क्रू सदस्य सवार थे। हादसे के बाद भारतीय तटरक्षक बल और नौसेना ने बचाव अभियान शुरू कर दिया है।

कहां और कैसे हुआ हादसा?
अधिकारियों के अनुसार, मालवाहक जहाज ओडिशा से लौह अयस्क लेकर सिंगापुर की ओर जा रहा था। उसने शुक्रवार को ओडिशा के तट से अपनी यात्रा शुरू की थी। शनिवार को यह जहाज बंगाल की खाड़ी में डूब गया। जहाज के डूबने की सूचना मिलते ही आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी अलर्ट किया गया, ताकि बचाव अभियान में मदद मिल सके।

जहाज पर कितने लोग थे?
मालवाहक जहाज पर कुल 24 क्रू सदस्य मौजूद थे। एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने बताया कि इनमें से ज्यादातर सदस्य चीनी नागरिक थे। अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचाया जा सका है। बचाव अभियान जारी है और अधिकारियों की नजर रेस्क्यू ऑपरेशन पर बनी हुई है।

भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल ने संभाला मोर्चा
जहाज के डूबने की जानकारी मिलने के बाद भारतीय तटरक्षक बल और भारतीय नौसेना ने बचाव अभियान शुरू किया। आसपास के जहाजों को भी सहायता के लिए सतर्क किया गया है। फिलहाल अधिकारियों की प्राथमिकता जहाज पर सवार सभी क्रू सदस्यों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित निकालना है।

शनिवार को पीपल के पेड़ पर छाछ चढ़ाने की मान्यता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व

शनिवार को पीपल के पेड़ पर छाछ चढ़ाने की मान्यता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व

 नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल का संबंध भगवान विष्णु, ब्रह्मा, महेश और शनिदेव से जोड़ा जाता है। इसी वजह से शनिवार के दिन पीपल की पूजा और उससे जुड़े उपायों का विशेष महत्व बताया गया है।धार्मिक परंपराओं में एक उपाय पीपल की जड़ में छाछ या मट्ठा अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि शनिवार को लगातार सात सप्ताह तक श्रद्धा के साथ यह उपाय करने से शनि से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है। इसे आर्थिक संकट, कर्ज और जीवन में आने वाली बाधाओं से जोड़कर भी देखा जाता है।

क्या है तरीका?
शनिवार सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद पीपल के पेड़ के पास जाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करने की परंपरा है। इसके बाद पेड़ की जड़ में छाछ अर्पित की जाती है। धार्मिक विश्वास रखने वाले लोग इसे सात शनिवार तक करने की मान्यता बताते हैं।

कहा जाता है कि, इस उपाय से नकारात्मकता दूर होती है, रुके काम बनने लगते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। हालांकि, इन दावों के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में ही देखना उचित है। साथ ही पीपल के पेड़ और आसपास की मिट्टी को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू के अवैध उत्पादन नेटवर्क का भंडाफोड़, 185 करोड़ की कर चोरी उजागर

उत्तर प्रदेश में पान मसाला और तंबाकू के अवैध उत्पादन नेटवर्क का भंडाफोड़, 185 करोड़ की कर चोरी उजागर

 डीजीजीआई की कार्रवाई में 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त, चित्रकूट-बांदा के छह परिसरों से 15.50 लाख से अधिक तैयार पाउच बरामद

नई दिल्ली । जीएसटी खुफिया महानिदेशालय (डीजीजीआई) की लखनऊ क्षेत्रीय इकाई ने उत्तर प्रदेश के चित्रकूट और बांदा जिलों में पान मसाला, सुगंधित जर्दा और गुटखा के अवैध उत्पादन से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। छह उत्पादन परिसरों में की गई कार्रवाई के दौरान 27 अघोषित पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की गईं और करीब 185 करोड़ रुपये की जीएसटी, स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा (एचएसएनएस) उपकर तथा केंद्रीय उत्पाद शुल्क की चोरी का पता चला है।

डीजीजीआई अधिकारियों ने खुफिया जानकारी के आधार पर 18 अगस्त 2026 की मध्यरात्रि के आसपास चित्रकूट और बांदा स्थित छह परिसरों में एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया। ये परिसर दो फर्मों से जुड़े पाए गए। इनमें से एक पान मसाला एवं संबंधित उत्पादों के उत्पादन, जबकि दूसरी व्यापारिक गतिविधियों में शामिल थी।

27 अघोषित मशीनें मिलीं
तलाशी के दौरान अधिकारियों को 27 ऐसी पाउच-पैकिंग मशीनें मिलीं, जिनका घोषित उत्पादन व्यवस्था में उल्लेख नहीं था। इनमें सुगंधित जर्दा के लिए छह, पान मसाला के लिए नौ और दोहरा/देसी गुटखा के लिए 12 मशीनें शामिल हैं। इसके अलावा मिश्रण, सुपारी की कुटाई और सुखाने में इस्तेमाल होने वाली मशीनें भी बरामद की गईं।

कार्रवाई के दौरान पान मसाला, चबाने वाला तंबाकू, सुगंधित जर्दा और सुगंधित सुपारी के 15,50,922 तैयार पाउच जब्त किए गए।
जांच के दौरान बड़ी मात्रा में कच्चा माल और पैकिंग सामग्री भी बरामद हुई। इसमें 32.9 मीट्रिक टन सुपारी एवं कटी सुपारी, 2.8 मीट्रिक टन तंबाकू, 8.4 मीट्रिक टन पैकिंग सामग्री, पाउच और लैमिनेट्स, 470 किलोग्राम कत्था पाउडर, 850 किलोग्राम ग्लिसरीन, 545 किलोग्राम एसेंस और 256 किलोग्राम बिना पैक किया हुआ पान मसाला शामिल है।

अपंजीकृत परिसरों से चल रहा था कारोबार
जांच में सामने आया कि अवैध कारोबार अपंजीकृत परिसरों के एक नेटवर्क के माध्यम से संचालित किया जा रहा था। इन परिसरों में अघोषित मशीनरी के जरिए पान मसाला और तंबाकू उत्पादों का उत्पादन किया जाता था। तैयार माल को लागू जीएसटी, एचएसएनएस उपकर और केंद्रीय उत्पाद शुल्क का भुगतान किए बिना कथित तौर पर गुप्त रूप से बाजार में भेजा जा रहा था।

जांच एजेंसी के अनुसार, निर्माण फर्म के मालिक की इस अवैध उत्पादन और माल की निकासी की गतिविधियों को संगठित करने में प्रमुख भूमिका सामने आई है।

मालिक गिरफ्तार, न्यायिक हिरासत में भेजा गया
फर्म के मालिक को 19 अगस्त 2026 को स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 की धारा 26 और केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 की धारा 13 के तहत गिरफ्तार किया गया। उसे विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीमा शुल्क), लखनऊ के समक्ष पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मामले की जांच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढऩे पर और बरामदगी तथा कर चोरी से जुड़े तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है।

1 फरवरी से लागू है क्षमता आधारित कर व्यवस्था
पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में 1 फरवरी 2026 से क्षमता आधारित उपकर और कर व्यवस्था लागू की गई है। स्वास्थ्य सुरक्षा से राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर अधिनियम, 2025 के तहत पान मसाला पर क्षमता आधारित मासिक उपकर लगाया जाता है। इसकी गणना स्थापित पाउच-पैकिंग मशीनों की संख्या, प्रकार और क्षमता के आधार पर की जाती है।

इसी तरह केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, 1944 के तहत चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पर भी क्षमता आधारित केंद्रीय उत्पाद शुल्क लागू है। डीजीजीआई के अनुसार, कुछ निर्माता अघोषित मशीनों का इस्तेमाल कर उत्पादन छिपाने और कर एवं उपकर से बचने का प्रयास करते हैं।

देशभर में 27 मामले दर्ज, 668 करोड़ की चोरी का पता
अघोषित उत्पादन और कर चोरी पर अंकुश लगाने के लिए डीजीजीआई ने देशभर में खुफिया सूचना आधारित प्रवर्तन कार्रवाई तेज की है। डेटा विश्लेषण से जुड़ी विभिन्न इकाइयों के समन्वय से अवैध उत्पादन और कर चोरी के मामलों की पहचान की जा रही है।

1 फरवरी 2026 से अब तक डीजीजीआई की विभिन्न इकाइयों ने देशभर में ऐसे 27 मामले दर्ज किए हैं। इन मामलों में कुल 668 करोड़ रुपये के शुल्क, कर और उपकर की चोरी का पता चला है। जांच के दौरान 11.7 करोड़ रुपये की राशि स्वेच्छा से जमा की गई है।

इसके अलावा, कार्रवाई के दौरान अब तक 131 पाउच-पैकिंग मशीनें जब्त की जा चुकी हैं और 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। डीजीजीआई की कार्रवाई से पान मसाला और तंबाकू क्षेत्र में अघोषित उत्पादन तथा कर चोरी के खिलाफ प्रवर्तन अभियान तेज होने के संकेत मिले हैं।

छोटे बच्चों की दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, 4 साल से कम उम्र में एफडीसी पर रोक

छोटे बच्चों की दवाओं पर सरकार का बड़ा फैसला, 4 साल से कम उम्र में एफडीसी पर रोक

 नई दिल्ली। छोटे बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सर्दी-जुकाम में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाओं को लेकर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फेनिलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड वाले फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (FDC) के निर्माण, बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की नई अधिसूचना के मुताबिक, इन दोनों दवाओं वाले किसी भी फॉर्मूलेशन को अब चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। कंपनियों को दवाओं के लेबल, पैकेज इंसर्ट और प्रचार सामग्री पर स्पष्ट चेतावनी देना भी अनिवार्य किया गया है।

सरकार ने यह फैसला विशेषज्ञ समिति और ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर लिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे बच्चों में इस संयोजन से दुष्प्रभाव का खतरा हो सकता है, जबकि सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं। इससे पहले अप्रैल 2025 में सरकार ने कुछ चुनिंदा एफडीसी पर प्रतिबंध लगाया था। अब नए आदेश के जरिए इसका दायरा बढ़ाकर इन दोनों सामग्रियों वाले सभी फॉर्मूलेशन तक कर दिया गया है। अधिसूचना ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26ए के तहत जारी हुई है और गजट में प्रकाशन के साथ लागू होगी। नए फैसले से बाजार में मौजूद कई बच्चों की सर्दी-जुकाम वाली दवाओं पर असर पड़ सकता है।

राजस्थान में दर्दनाक सड़क हादसा, एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, हाईवे जाम

राजस्थान में दर्दनाक सड़क हादसा, एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, हाईवे जाम

 जयपुर। राजस्थान के फागी इलाके में शुक्रवार शाम हुए भीषण सड़क हादसे ने एक परिवार को उजाड़ दिया। तेज रफ्तार एसयूवी की चपेट में आने से एक दंपति और उनकी दो बहुओं की मौत हो गई। हादसा सरमथुरा-फलोदी मेगा हाईवे पर माधोराजपुरा रोड के पास हुआ। पुलिस के मुताबिक, सत्यनारायण कुम्हार अपने खेत से काटी गई मूंग की फसल सड़क किनारे सुखा रहे थे। उनकी पत्नी मनमौजी और दोनों बहुएं अमृता व शिमला भी उनके साथ थीं। इसी दौरान तेज रफ्तार कार ने चारों को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि सभी कई फीट दूर जा गिरे और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।

घटना की खबर फैलते ही ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। शवों को फागी उप-जिला अस्पताल की मोर्चरी में भेजा गया, जहां बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। ग्रामीणों ने मुआवजे की मांग को लेकर जयपुर-भीलवाड़ा मेगा हाईवे पर जाम लगा दिया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों से बातचीत की। कई घंटे की मशक्कत के बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया। मृतकों में शिमला प्रशिक्षित नर्स थीं और उनकी आठ महीने की बेटी है। उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा ने हादसे पर दुख जताते हुए अधिकारियों को पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद के निर्देश दिए हैं।

चारधाम यात्रा में 48 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, यमुनोत्री में बना नया रिकॉर्ड

चारधाम यात्रा में 48 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे, यमुनोत्री में बना नया रिकॉर्ड

 देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद चारधाम यात्रा जारी है। यात्रा के 125 दिनों में 48 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधामों के दर्शन कर चुके हैं। यह संख्या पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 5 लाख 22 हजार 634 अधिक है। वहीं, यमुनोत्री धाम में श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। पहली बार यहां 6.68 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चारधाम यात्रियों की सुरक्षा प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चारों धामों और यात्रा पड़ावों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। जिलाधिकारियों को भी यात्रा व्यवस्थाओं पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

राज्य सरकार के अनुसार, मानसून को देखते हुए चारधाम यात्रा को विशेष सतर्कता और निगरानी के साथ संचालित किया जा रहा है। यात्रा से जुड़े रुद्रप्रयाग,चमोली और उत्तरकाशी जिलों में आपदा प्रबंधन तंत्र को चौबीसों घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। मौसम खराब होने की स्थिति में यात्रा को नियंत्रित किया जा रहा है और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

यमुनोत्री धाम में इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या ने नया रिकॉर्ड कायम किया है। पहली बार यहां 6 लाख 68 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। शुक्रवार तक 6 लाख 68 हजार 163 श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन कर चुके हैं। वर्ष 2025 में यह संख्या 6 लाख 44 हजार 637 थी।

इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। 21 अगस्त तक बदरीनाथ में 16 लाख 54 हजार 263, केदारनाथ में 14 लाख 65 हजार 370, गंगोत्री में 7 लाख 47 हजार 671 और यमुनोत्री में 6 लाख 68 हजार 163 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। वहीं, हेमकुंड साहिब में 2 लाख 69 हजार 430 श्रद्धालु मत्था टेक चुके हैं। बदरीनाथ धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में यहां इस वर्ष 3 लाख 62 हजार 304 अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं।

यमुनोत्री धाम में प्रतिवर्ष श्रद्धालुओं की संख्या

2025------6,44,637

2024------5,15,067

2023------5,60,918

2022------6,21,538

2021--------33,311

2020---------7728

2019---------4,65,534

2018---------3,94,445

2017---------3,92,208

2016---------1,55,129

2015---------1,22,926

2014---------038,294

2013---------253110

2012---------413615

2011---------448945

2010---------309634

2009--------322242

2008--------327611

2007--------287870

2006--------216883

2005--------169046

2004--------102331

2003--------78,050

2002--------54023

2001--------54074

2000-------88672

नितिन नबीन ने भाजपा की नयी राष्ट्रीय टीम के साथ की पहली बैठक, चुनावी रणनीति पर हुई चर्चा

नितिन नबीन ने भाजपा की नयी राष्ट्रीय टीम के साथ की पहली बैठक, चुनावी रणनीति पर हुई चर्चा

 भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पार्टी के नवनियुक्त राष्ट्रीय पदाधिकारियों के साथ शनिवार को पहली बैठक की जिसमें चुनावी रणनीति और जमीनी स्तर पर जनसंपर्क को लेकर चर्चा की गई। पार्टी सूत्रों ने यह जानकारी दी।

बैठक में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों, बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने और सरकार की योजनाओं एवं पहलों को जनता तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने बताया कि दिन में और बैठकें प्रस्तावित हैं, जिनमें भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष और राज्य प्रभारी शामिल होंगे।

ज्ञात हो, भाजपा ने इस सप्ताह की शुरुआत में नितिन नवीन के नेतृत्व में नयी राष्ट्रीय टीम की घोषणा की थी। इसमें कुल 65 पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें 51 नए चेहरे हैं। नयी टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व पदाधिकारी राम माधव सहित 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को आठ राष्ट्रीय महासचिवों में से एक नियुक्त किया गया है। बी.एल. संतोष को राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) पद पर बरकरार रखा गया है, जबकि विनोद तावड़े और सुनील बंसल महासचिव पद पर हैं। भाजपा की नयी टीम में 12 महिलाएं और अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े छह नेता शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है। इससे पहले भी वह मई 2014 में नरेन्द्र मोदी सरकार के गठन से पहले इस पद पर रह चुके हैं। भाजपा ने अपने सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय को पद से हटाकर उनकी जगह छत्तीसगढ़ के दीपक म्हास्के को नियुक्त किया है।

वहीं, गुजरात के हेमांग जोशी को पार्टी युवा मोर्चा का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने लोकसभा सांसद तेजस्वी सूर्या का स्थान लिया है।

दरअसल, यह संगठनात्मक बदलाव वर्ष 2015 में तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कार्यकाल में हुए बड़े फेरबदल के बाद एक दशक से अधिक समय में सबसे बड़ा बदलाव है। इस फेरबदल के बाद संभावित केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। 

राष्ट्रपति मुर्मु शिक्षक दिवस पर 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी

राष्ट्रपति मुर्मु शिक्षक दिवस पर 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 5 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में स्थित विज्ञान भवन में 48 स्कूली शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करेंगी। इस कार्यक्रम में प्रत्येक पुरस्कार विजेता के द्वारा किए गए अनुकरणीय कार्यों को दर्शाने वाले लघु वृत्तचित्रों को प्रदर्शित किया जाएगा।

इस कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन और शिक्षा मंत्रालय के स्वयं प्रभा चैनलों पर लाइव किया जाएगा और इसे https://webcast.gov.in/moe पर लाइव स्ट्रीम भी किया जाएगा। इस कार्यक्रम को शिक्षा मंत्रालय के विभिन्न सोशल मीडिया चैनलों पर भी लाइव देखा जा सकता है।

शिक्षा मंत्रालय का स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग एक कड़ी, पारदर्शी और ऑनलाइन चयन प्रक्रिया के माध्यम से चुने गए देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान करने के लिए हर साल शिक्षक दिवस (5 सितंबर) पर एक राष्ट्रीय स्तर के समारोह का आयोजन करता है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार का उद्देश्य देश के कुछ बेहतरीन शिक्षकों के अद्वितीय योगदान का उत्सव मनाना और उन शिक्षकों को सम्मानित करना है, जिन्होंने अपनी अपनी लगन और मेहनत से न केवल स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया है, बल्कि अपने छात्रों के जीवन को भी समृद्ध किया है।

राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए योग्य शिक्षकों से ऑनलाइन नामांकन 15.06.2026 से 20.07.2026 तक शिक्षा मंत्रालय के पोर्टल http://nationalawardstoteachers.education.gov.in के माध्यम से आमंत्रित किए गए थे।

इस साल स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग ने जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर तीन चरणों वाली चयन प्रक्रिया के जरिए कुल 48 स्कूल शिक्षकों को चुना है। चुने गए 48 स्कूल शिक्षक 27 राज्यों, 7 केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्र सरकार के 6 संगठनों से हैं। चुने गए 48 स्कूल शिक्षकों में से 26 पुरुष और 22 महिलाएं हैं।

ऊर्जा सुरक्षा के लिए नियामक ने 7,000 करोड़ रुपये के एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी दी

ऊर्जा सुरक्षा के लिए नियामक ने 7,000 करोड़ रुपये के एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क को मंजूरी दी

 तेल क्षेत्र के नियामक ने 7,000 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश से लगभग 1,800 किलोमीटर लंबी नई एलपीजी पाइपलाइनों के विकास को मंजूरी दे दी है। इससे देश के ‘कॉमन-कैरियर’ एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क में लगभग एक-चौथाई का विस्तार होगा। इस पहल का मकसद ईंधन आपूर्ति को अधिक लचीला बनाना और सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करना है।

6 राज्यों के लिए मंजूरी

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) ने एक बयान में कहा कि उसने तेलंगाना, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, कर्नाटक और गोवा में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तीन एलपीजी पाइपलाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

सरकारी कंपनी गेल (इंडिया) लिमिटेड द्वारा विकसित की जाने वाली इन परियोजनाओं से पीएनजीआरबी द्वारा अधिकृत कॉमन-कैरियर एलपीजी पाइपलाइन नेटवर्क लगभग 7,700 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 9,500 किलोमीटर हो जाएगा, जो लगभग 23.5 प्रतिशत की वृद्धि है।

आयातित एलपीजी पर अत्यधिक निर्भरता

यह विस्तार ऐसे समय में किया जा रहा है जब भारत आयातित एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर है, जिसकी थोक आपूर्ति तटीय आयात टर्मिनलों पर पहुंचती है और फिर देश भर के उपभोग केंद्रों तक पहुंचाई जाती है। एक बड़े पाइपलाइन नेटवर्क से देश के भीतरी इलाकों में एलपीजी पहुंचाने की दक्षता और विश्वसनीयता में सुधार होने की उम्मीद है।

3 नई परियोजनाएं

मंजूरी दी गई तीन नई परियोजनाएं हैं- चेर्लापल्ली (तेलंगाना) से नागपुर (महाराष्ट्र) तक 556 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, झांसी (उत्तर प्रदेश) से सितारगंज (उत्तराखंड) तक 611 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन, और शिकारपुर (महाराष्ट्र) से गोवा और हुबली (कर्नाटक) तक 633 किलोमीटर लंबी लाइन।

राजनाथ सिंह ने नोएडा में अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन किया

राजनाथ सिंह ने नोएडा में अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन किया

 रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को नोएडा में इंदिरा गांधी कला केंद्र सभागार में महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के नए इंटीग्रेटेड डायग्नोस्टिक सेंटर का उद्घाटन किया। इस मौके पर नोएडा सांसद डॉ. महेश शर्मा के साथ लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज भी उपस्थित रहीं। यह केंद्र उत्तर प्रदेश में कंपनी का पहला सेंटर है, जो दिल्ली और हरियाणा के बाद यूपी में अपने विस्तार की शुरुआत नोएडा से कर रही है।

राजनाथ सिंह ने कहा

उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मेडिकल तकनीक ने अभूतपूर्व प्रगति की है। पहले जिन बीमारियों का पता लगाना काफी मुश्किल होता था, अब आधुनिक जांच तकनीकों के माध्यम से उनकी पहचान जल्द और अधिक सटीक तरीके से संभव हो पा रही है। अच्छी जांच व्यवस्था का उद्देश्य केवल बीमारी का पता लगाना नहीं, बल्कि मरीज को अनावश्यक जांच और गलत निदान से बचाना भी होना चाहिए।

आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एकीकृत दृष्टिकोण को समय की जरूरत

रक्षा मंत्री ने आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में एकीकृत दृष्टिकोण को समय की जरूरत बताते हुए कहा कि रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी और अन्य जांच सुविधाएं एक ही केंद्र पर उपलब्ध होने से मरीजों को बार-बार अलग-अलग स्थानों पर भटकने की आवश्यकता नहीं पड़ती। साथ ही, डॉक्टरों को भी सभी जांच रिपोर्ट एक साथ मिल जाने से उपचार संबंधी निर्णय लेने में काफी आसानी होती है।

उन्होंने मेडिकल साइंस और रक्षा क्षेत्र के बीच पुराने और महत्वपूर्ण संबंधों का जिक्र किया

उन्होंने मेडिकल साइंस और रक्षा क्षेत्र के बीच पुराने और महत्वपूर्ण संबंधों का भी जिक्र किया और कहा कि रेडियोलॉजी जैसी तकनीकों का विकास और उनका इस्तेमाल सैन्य क्षेत्र में भी अहम रहा है। अल्ट्रासोनोग्राफी जैसी तकनीकों का उपयोग सैनिकों की चिकित्सा जांच और युद्धक्षेत्र में घायल जवानों की स्थिति का आकलन करने में किया जाता रहा है। सैन्य क्षेत्र में मजबूत चिकित्सा व्यवस्था अत्यंत जरूरी है और भविष्य में मेडिकल विज्ञान को नई तकनीकों के साथ निरंतर जोड़ना होगा।

45 करोड़ लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच

रक्षा मंत्री ने बताया कि आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के माध्यम से करीब 45 करोड़ लोगों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच बनी है। उत्तर प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में करीब 5 करोड़ लोग स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आए हैं और लगभग 80 लाख लोगों को इसका सीधा लाभ मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्वास्थ्य क्षेत्र में आधारभूत ढांचे का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में जहां करीब 12 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर करीब 45 हो गई है। साथ ही, प्रदेश के करीब 75 जिलों में निःशुल्क डायलिसिस सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, जो गुर्दा रोगियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

वर्ष 2050 तक बुजुर्गों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना

भविष्य की चुनौतियों की ओर इशारा करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत आज युवा आबादी वाला देश है, लेकिन आने वाले दशकों में जनसंख्या की उम्र बढ़ेगी। वर्ष 2050 तक बुजुर्गों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है, जिससे अस्पतालों पर दबाव बढ़ेगा। इससे निपटने के लिए बीमारी होने के बाद इलाज करने की बजाय प्रिवेंटिव हेल्थ केयर (रोग निवारण) को प्राथमिकता देना अत्यंत जरूरी है।

बता दें कि महाजन इमेजिंग एंड लैब्स के इस नए केंद्र में एआई आधारित अल्ट्रा-फास्ट 3.0 टेस्ला एमआरआई और 160-स्लाइस सीटी स्कैनर जैसी अत्याधुनिक जांच सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। एक ही छत के नीचे रेडियोलॉजी, पैथोलॉजी, जीनोमिक्स और व्यक्तिगत स्वास्थ्य जांच की सुविधाएं होने से नोएडा और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। 

देश की असली तरक्की उन फैसलों से होती है जिनका असर जमीन पर दिखता: PM मोदी

देश की असली तरक्की उन फैसलों से होती है जिनका असर जमीन पर दिखता: PM मोदी

 पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि देश की असली तरक्की उन फैसलों से होती है जिनका असर जमीन पर दिखता है और जो चुनावी फायदे के लिए किए गए अल्पकालिक (short-term) ऐलान के बजाय वर्तमान और भविष्य दोनों की ज़रूरतों में संतुलन बनाते हैं।

एक निजी कार्यक्रम ‘वर्ल्ड लीडर्स फोरम’ में बोलते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति में अक्सर ऐसे फैसलों की चर्चा होती है जिनका असर सिर्फ़ एक-दो दिन ही रहता है। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारें अक्सर जनता के सामने ऐसे ऐलान करती थीं जिनसे देश के बंटने का खतरा रहता था। इसके उलट, स्थायी बदलाव उन नीतियों से आता है जो देश के दीर्घकालिक (long-term) हितों को सुरक्षित रखते हुए साफ नतीजे देती हैं।

अपनी सरकार की दो प्रमुख योजनाओं का उदाहरण देते हुए, PM मोदी ने PM-कुसुम योजना और PM सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि PM-कुसुम योजना के तहत किसानों को सिंचाई के लिए बिजली की लगातार चिंता से राहत मिली है। उन्होंने कहा कि PM सूर्य घर योजना ने घरों की छतों को मुफ्त बिजली के स्रोत में बदलकर मध्यम वर्ग को बहुत फायदा पहुंचाया है।

पीएम ने कहा, “हमने हर घर की छत पर सूरज (सोलर सिस्टम) लगाने की योजना बनाई थी,” और बताया कि अब 50 लाख से ज़्यादा परिवार इस योजना से जुड़ चुके हैं। सरकार ने इन परिवारों को सोलर सिस्टम लगाने के लिए 22,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की मदद दी है। लाभार्थी न केवल वॉशिंग मशीन और टेलीविज़न जैसी रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए अपनी बिजली खुद बना रहे हैं, बल्कि अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर कमाई भी कर रहे हैं। नतीजतन, उनके बिजली के बिल ज़ीरो हो गए हैं और अतिरिक्त आमदनी भी होने लगी है।

PM मोदी ने कहा कि इस योजना ने आम नागरिकों के सपने पूरे किए हैं। इसने बिजली कटौती को खत्म किया है, जिसकी वजह से पहले दूध खराब हो जाता था और स्कूल जाने वाले बच्चों की पढ़ाई में रुकावट आती थी। कई परिवारों के लिए मुफ़्त या किफायती उपकरण हकीकत बन गए हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि चुनावी चक्र से परे, रूफटॉप सोलर के फायदे व्यवसायों का विस्तार करते रहेंगे और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाते रहेंगे।

अपनी सरकार के संकल्प को दोहराते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को तेज़ी से आगे ले जाने के लिए पूरे समर्पण के साथ काम जारी रहेगा। इस भरोसे के साथ कि भारत दुनिया के भविष्य को आकार देने में अहम भूमिका निभाएगा, उन्होंने उम्मीद जताई कि एक मज़बूत, सुरक्षित और ज़्यादा सक्षम भारत उभरकर सामने आएगा जो वैश्विक मंच पर सार्थक योगदान देगा।

भारत ‘प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट’ से हटकर PLI के जरिए उत्पादन को बढ़ावा देने की ओर बढ़ा है: PM मोदी

भारत ‘प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट’ से हटकर PLI के जरिए उत्पादन को बढ़ावा देने की ओर बढ़ा है: PM मोदी

 पीएम मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत ‘लाइसेंस राज’ के दौर की “प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट” वाली सोच से हटकर ऐसे मॉडल की ओर बढ़ा है जो ज्यादा उत्पादन को बढ़ावा देता है। उन्होंने देश की बदलती आर्थिक सोच के उदाहरण के तौर पर प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम के प्रदर्शन का जिक्र किया।

राजधानी में एक मीडिया इवेंट को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा कि PLI स्कीम से 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया है और इससे 22 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री हुई है। उन्होंने कहा कि इस स्कीम से 15 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ है और 14 लाख से ज़्यादा नौकरियां पैदा हुई हैं।

पीएम ने कहा कि यह बदलाव कारोबार और उत्पादन के प्रति सरकार की सोच में आए बड़े बदलाव को दिखाता है। “पाबंदियां लगाने के बजाय, केंद्र सरकार ऐसा माहौल बनाने पर ध्यान दे रही है जो कंपनियों को मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करे।”

पीएम मोदी ने अनिश्चित वैश्विक माहौल का भी ज़िक्र किया और कहा कि दुनिया बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रही है क्योंकि संसाधनों का इस्तेमाल हथियार के तौर पर किया जा रहा है और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में अविश्वास आम बात होती जा रही है।

इस माहौल में, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत “इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने की उम्मीद की किरण” और विकास व आशा का एक उज्ज्वल केंद्र बनकर उभर रहा है। पीएम मोदी ने कहा, “IMF का अनुमान है कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के तौर पर आगे बना रहेगा, और भारत इसे हकीकत बनाने की सभी कोशिशों में सबसे आगे है।”

पीएम ने कहा कि भारत का भविष्य अकेले रहकर नहीं बनाया जा सकता और उन्होंने दुनिया में जारी उथल-पुथल के बीच देश के लिए दुनिया के साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने “सबको साथ लेकर चलने” (leading with all) का तरीका अपनाया है और तेज़ी से बदलते अनिश्चित वैश्विक आर्थिक माहौल में साझेदारी और सहयोग के महत्व को रेखांकित किया।

Transfers: मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 32 IAS समेत कई अफसरों के तबादले

Transfers: मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, 32 IAS समेत कई अफसरों के तबादले

 मध्यप्रदेश।  मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के आदेश के मुताबिक 32 IAS और 4 राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल में ग्रामीण विकास से जुड़े अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। इसके साथ ही ग्वालियर और सतना नगर निगम के आयुक्त भी बदले गए हैं। इसके अलावा करीब 10 जिलों के CEO जिला पंचायत को भी नई जगह पदस्थ किया गया है।

2016 से 2024 बैच तक के अफसरों को नई जिम्मेदारी
जारी आदेश में 2016 से 2024 बैच तक के अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है। इनमें CEO जिला पंचायत, अपर कलेक्टर, SDM और सहायक कलेक्टर स्तर के अधिकारी शामिल हैं। कुछ अधिकारियों को राज्य शासन के अलग-अलग विभागों में उप सचिव बनाया गया है, जबकि कुछ को नगर निगम में आयुक्त और अपर आयुक्त की जिम्मेदारी दी गई है।

ग्वालियर नगर निगम के कमिश्नर बदले
अभिषेक चौधरी (2018 बैच) को CEO जिला पंचायत धार से हटाकर आयुक्त, नगर पालिक निगम ग्वालियर बनाया गया है। वहीं ग्वालियर नगर निगम के मौजूदा आयुक्त संघ प्रिय को अब CEO जिला पंचायत सिंगरौली की जिम्मेदारी दी गई है। अक्षय कुमार तेजपाल को CEO जिला पंचायत दतिया से अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम भोपाल बनाया गया है।

सतना नगर निगम को भी मिला नया आयुक्त
डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा (2019 बैच) को CEO जिला पंचायत खंडवा से आयुक्त, नगर पालिक निगम सतना बनाया गया है। उन्हें CEO स्मार्ट सिटी सतना का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है।

जिला पंचायतों में भी बड़ा बदलाव
तबादला सूची में कई जिलों के CEO जिला पंचायत बदले गए हैं। जगदीश कुमार गोमे को CEO जिला पंचायत सिंगरौली से CEO जिला पंचायत सागर बनाया गया है। नवीन कुमार धुर्वे को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ से CEO जिला पंचायत देवास भेजा गया है। काजल जावला को CEO जिला पंचायत बड़वानी से अपर मिशन संचालक, राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल की जिम्मेदारी दी गई है। अभिषेक सराफ को CEO जिला पंचायत बालाघाट से अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास बनाया गया है। विवेक के. डी. को CEO जिला पंचायत सागर से CEO, जबलपुर विकास प्राधिकरण बनाया गया है।

2022 बैच के अधिकारियों को भी नई पोस्टिंग
2022 बैच के अधिकारियों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। ईश्वर्य वर्मा को CEO जिला पंचायत खंडवा बनाया गया है। कार्तिकेय जायसवाल को CEO जिला पंचायत श्योपुर और विशाल धाकड़ को CEO जिला पंचायत टीकमगढ़ की जिम्मेदारी दी गई है। अर्पित गुप्ता को CEO जिला पंचायत बड़वानी और तनुश्री मीणा को CEO जिला पंचायत बालाघाट बनाया गया है। वहीं आशीष को अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम इंदौर की जिम्मेदारी मिली है।

कई अधिकारियों को उप सचिव बनाया गया
संजना जैन को अपर कलेक्टर मेहर से उप सचिव, जल संसाधन विभाग भेजा गया है। ज्योति शर्मा को CEO जिला पंचायत देवास से उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन बनाया गया है। अंजली जोसेफ जोनाथन को CEO जिला पंचायत हरदा से उप सचिव, लोक निर्माण विभाग की जिम्मेदारी दी गई है। अनिल कुमार डामोर को अपर कलेक्टर विदिशा से उप सचिव, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पदस्थ किया गया है।

2024 बैच के अधिकारियों को SDM की जिम्मेदारी
2024 बैच के कई सहायक कलेक्टरों को अब अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की जिम्मेदारी दी गई है।

इनमें आशीष कुमार को बीना, अनिकेत शांडिल्य को बैहर, आकाश अग्रवाल को मझौली, पाटिल आशीष अशोक को कुक्षी, सुशील श्रीकृष्ण श्रीराम को देवसर, कुलदीप पटेल को बिछिया, जमादार फरहान इरफान को शाहपुरा, ठाकुर ऋत्विक विजय को बिजावर और नवकीरण कौर को उदयपुरा का SDM बनाया गया है।

श्रद्धा शुक्ला को अपर कलेक्टर खंडवा की जिम्मेदारी
आदेश के अनुसार श्रद्धा शुक्ला (2022 बैच) को अपर कलेक्टर, जिला खंडवा के पद पर पदस्थ किया गया है। आदेश में उनके लिए कनिष्ठ वेतनमान का भी उल्लेख किया गया है। मध्यप्रदेश सरकार के इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल को ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन और जिला स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारत के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाएगी स्टारलिंक सेवा: एलन मस्क

भारत के ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में इंटरनेट पहुंच बढ़ाएगी स्टारलिंक सेवा: एलन मस्क

 दुनिया के सबसे अमीर उद्योगपति और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क ने शुक्रवार को कहा कि स्टारलिंक की उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा भारत में सबसे कम कनेक्टिविटी वाले क्षेत्रों, विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, क्योंकि कंपनी भारत में अपनी व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की मंजूरी का इंतजार कर रही है।

मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “स्टारलिंक भारत के सबसे कम सेवाएं प्राप्त क्षेत्रों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की मदद करेगा।” मस्क की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इंटरनेट पहुंच का अंतर अभी भी बना हुआ है। एक्स पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 तक देश के 11,256 सूचीबद्ध गांवों में अभी भी चौथी पीढ़ी की मोबाइल सेवा (4जी) उपलब्ध नहीं थी। यह दर्शाता है कि देश के कई दूरस्थ क्षेत्रों तक पारंपरिक दूरसंचार ढांचा अभी पूरी तरह नहीं पहुंच पाया है।

उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2026 तक भारत में कुल 109.3 करोड़ इंटरनेट सब्सक्रिप्शन्स थीं, जिनमें से 44.08 करोड़ सब्सक्रिप्शन्स ग्रामीण क्षेत्रों से थीं। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट सब्सक्रिप्शन घनत्व केवल प्रति 100 लोगों पर 48.31 था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 126.80 प्रति 100 लोगों तक पहुंच चुका था। इससे स्पष्ट होता है कि डिजिटल पहुंच के मामले में ग्रामीण और शहरी भारत के बीच अभी भी बड़ा अंतर मौजूद है।

इसी संदर्भ में पोस्ट में कहा गया कि भारत सरकार की भारतनेट परियोजना के तहत 8.5 लाख किलोमीटर से अधिक ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाया जा चुका है और लगभग 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को सेवाओं के लिए तैयार किया गया है। इसके बावजूद जून 2026 तक केवल 80,472 ग्राम पंचायत उपस्थिति केंद्र ही पूरी तरह परिचालन में थे।

पोस्ट में आगे कहा गया है कि उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाएं उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं जहां पारंपरिक मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पहुंचाना कठिन और महंगा है। इनमें दूरस्थ गांव, पर्वतीय क्षेत्र, द्वीपीय इलाके और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं। पोस्ट में यह भी कहा गया कि भारत में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू होने से पहले नियामकीय मंजूरियां, स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य आवश्यक स्वीकृतियां पूरी की जानी चाहिए। कंपनी लंबे समय से भारतीय बाजार में प्रवेश की तैयारी कर रही है। स्टारलिंक, स्पेसएक्स की उपग्रह इंटरनेट सेवा है, जो निम्न-पृथ्वी कक्षा (एलईओ) में स्थापित हजारों उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट उपलब्ध कराती है, जिसका उद्देश्य उन क्षेत्रों तक उच्च-गति इंटरनेट पहुंचाना है जहां पारंपरिक ब्रॉडबैंड सेवाएं सीमित या अनुपलब्ध हैं।

इससे पहले अगस्त में एक सरकारी अधिकारी ने कहा था कि एलन मस्क की कंपनी एक्स को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के नए नियम का पालन करना होगा, जिसके तहत किसी भी सार्वजनिक सरकार द्वारा सामग्री हटाने के अनुरोध को अस्वीकार किया जा सकता है। इसके अलावा, एलन मस्क ने दावा किया है कि एक्स में शामिल एक नए एल्गोरिदम का खुलासा करने के बाद ‘सरकारों द्वारा आवश्यक कोई भी सेंसरशिप अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है’।

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