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15 अगस्त पर लाल किले में क्या-क्या होगा? ध्वजारोहण से 21 तोपों की सलामी तक, जानिए पूरा कार्यक्रम

15 अगस्त पर लाल किले में क्या-क्या होगा? ध्वजारोहण से 21 तोपों की सलामी तक, जानिए पूरा कार्यक्रम

 नई दिल्ली- देश 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराएंगे और देश को संबोधित करेंगे। इस वर्ष के समारोह में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और ‘विकसित भारत @2047 में युवा शक्ति की भूमिका’ पर विशेष जोर रहेगा।

स्वतंत्रता दिवस समारोह में ध्वजारोहण, 21 तोपों की सलामी, वायुसेना के हेलिकॉप्टरों से पुष्पवर्षा और प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन प्रमुख आकर्षण होंगे। इस बार करीब 5,000 विशेष अतिथियों को भी समारोह में आमंत्रित किया गया है।

लाल किले पर पहुंचते ही PM का भव्य स्वागत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पहुंचने पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री को सलामी स्थल तक ले जाया जाएगा, जहां इंटर-सर्विसेज और दिल्ली पुलिस की संयुक्त टुकड़ी उन्हें जनरल सलामी देगी।

इसके बाद प्रधानमंत्री चारों सेनाओं और दिल्ली पुलिस की टुकड़ियों से बने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण करेंगे। गार्ड ऑफ ऑनर में थलसेना, नौसेना, वायुसेना और दिल्ली पुलिस के जवान शामिल होंगे।

तिरंगा फहराते ही 21 तोपों की सलामी

गार्ड ऑफ ऑनर के बाद प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर पर पहुंचेंगे। वहां सेना के वरिष्ठ अधिकारी उनका स्वागत करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे।

तिरंगा फहराते ही 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। इस दौरान स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया जाएगा। यह पल स्वतंत्रता दिवस समारोह के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक होगा।

पहली बार सामूहिक रूप से गूंजेगा ‘वंदे मातरम्’

इस साल के समारोह में ‘वंदे मातरम्’ को विशेष महत्व दिया गया है। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रीय गीत की धुन बजाई जाएगी और समारोह में मौजूद लोग सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम्’ का गायन करेंगे।

इसके बाद राष्ट्रगान होगा। इस मौके पर भारतीय सेना का बैंड भी अपनी प्रस्तुति देगा।

आसमान से होगी फूलों की बारिश

ध्वजारोहण के साथ ही भारतीय वायुसेना के दो MI-17 हेलिकॉप्टर समारोह स्थल के ऊपर से उड़ान भरेंगे और पुष्पवर्षा करेंगे। इनमें से एक हेलिकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा ‘वंदे मातरम्’ से जुड़ा ध्वज लेकर उड़ेगा।

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करेंगे।

PM के भाषण के बाद भी होगा खास कार्यक्रम

प्रधानमंत्री के संबोधन के समापन के बाद NCC कैडेट्स और MY Bharat वॉलंटियर्स मिलकर ‘वंदे मातरम्’ का सामूहिक गायन करेंगे। इसके बाद राष्ट्रगान के साथ समारोह का औपचारिक समापन होगा।

इस साल करीब 2,500 NCC कैडेट्स और MY Bharat वॉलंटियर्स समारोह में हिस्सा लेंगे। उन्हें लाल किले के सामने ज्ञानपथ पर बैठाया जाएगा। यहां ‘विकसित भारत @2047’ की थीम को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

5 हजार खास मेहमान बनेंगे समारोह का हिस्सा

इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में लगभग 5,000 विशेष अतिथियों को आमंत्रित किया गया है। इनमें किसान, महिला उद्यमी, युवा इनोवेटर्स, वैज्ञानिक, स्टार्टअप से जुड़े लोग, स्वच्छता कर्मी, नर्सिंग स्टाफ, टैक्सी-कैब ड्राइवर, कारीगर और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं।

अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पारंपरिक वेशभूषा में आए 1,500 से अधिक लोगों को भी समारोह में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

VIP कल्चर से अलग होगा बैठने का इंतजाम

इस बार बैठने वाले घेरों को VIP नामों के बजाय देश की प्रमुख झीलों के नाम दिए गए हैं। इसका उद्देश्य समारोह में आमंत्रित लोगों के बीच समानता और अलग तरह का संदेश देना है।

मेहमानों की सुविधा के लिए क्लोक रूम, वॉलंटियर्स और व्हीलचेयर सहायता की भी व्यवस्था की गई है। मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग क्षेत्रों में भी NCC कैडेट्स लोगों की मदद के लिए तैनात रहेंगे।

सुबह 4 बजे से चलेगी दिल्ली मेट्रो

15 अगस्त को लोगों की सुविधा को देखते हुए दिल्ली मेट्रो सेवा सुबह 4 बजे से शुरू की जाएगी। आमंत्रित मेहमानों के लिए मेट्रो में मुफ्त यात्रा की सुविधा रहेगी और ई-निमंत्रण के साथ QR कोड भी उपलब्ध कराया जाएगा।

पार्किंग और पैदल आवाजाही को लेकर भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। मौसम को देखते हुए समारोह स्थल पर रेन पोंचो की व्यवस्था भी की गई है।

समारोह खत्म होते ही शुरू होगा सफाई अभियान

स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम समाप्त होने के बाद लाल किले और आसपास के क्षेत्र में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। NCC कैडेट्स और MY Bharat वॉलंटियर्स की मदद से प्लॉगिंग और कचरा हटाने का काम किया जाएगा।

बारिश की संभावना को देखते हुए लाल किले और आसपास की ड्रेनेज व्यवस्था को भी पहले से दुरुस्त किया जा रहा है।

यानी 15 अगस्त का समारोह सिर्फ ध्वजारोहण और प्रधानमंत्री के भाषण तक सीमित नहीं रहेगा। इस बार ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष और ‘विकसित भारत @2047’ की थीम के साथ युवा शक्ति को केंद्र में रखकर स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम खास बनाने की तैयारी है।

चमोली टनल हादसा: छत्तीसगढ़ के दो मजदूर समेत 7 की मौत, 12 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी

चमोली टनल हादसा: छत्तीसगढ़ के दो मजदूर समेत 7 की मौत, 12 घायल, रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी

  उत्तराखंड। चमोली के पीपलकोटी में निर्माणाधीन 3 किमी लंबी टनल में गुरुवार शाम लैंडस्लाइड के बाद पानी रिसने लगा। स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन्स सेंटर के मुताबिक मलबा और पानी भरने से अंदर काम कर रहे 22 मजदूर फंस गए थे। रेस्क्यू ऑपरेशन देर रात तक चलता रहा। जिनमें से 19 को अब तक बचा लिया गया है। घायलों का इलाज गोपेश्वर, पिपलकोटी और श्रीनगर के अस्पतालों में चल रहा है।  हादसे में 7 मौतों की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।

मृतकों की सूची

1. प्रदीप पंवार — टिहरी गढ़वाल, उत्तराखंड

2. मुकेश सिंह — चमोली, उत्तराखंड

3. दुर्लभ शर्मा — उत्तर प्रदेश

4. विजय हंसदा — उत्तर प्रदेश

5. जितेंद्र कुमार — उत्तर प्रदेश

6. लोकेश्वर — छत्तीसगढ़

7. भुनेश्वर — छत्तीसगढ़

घायलों की सूची

1. सुनील दीवान — छत्तीसगढ़

2. हरविल गुड़िया — तपरा

3. निस्तर भिंगरा — झारखंड

4. विनोद रावना — झारखंड

5. दीना बेगरा — झारखंड

6. खेला राम बिसरा — झारखंड

7. सुबोग सिंह — पंजाब

8. तिलकराज — हिमाचल प्रदेश

9. चंदन कुमार — रोहतास, बिहार

10. पेन सिंह — छत्तीसगढ़

11. रोहित पांडे — बिहार

12. गोविन्दो मंडल — वेस्ट बंगाल

शाम 7 बजे हादसा, पानी रिसने के साथ लैंडस्लाइड

अधिकारियों के मुताबिक हादसा गुरुवार 13 अगस्त को शाम करीब 7 बजे हुआ। पीपलकोटी के मायापुर में टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में पानी का रिसाव और भू-स्खलन हुआ। वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए। टनल के अंदर पानी और मलबा भरने के कारण फंसे मजदूरों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण है। बचाव दल लगातार अंदर पहुंचकर मजदूरों को बाहर निकालने में जुटे हैं।

रेस्क्यू में सेना और ITBP की टीमें भी लगीं

जिलाधिकारी गौरव कुमारबचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। रात 9 बजे तक 22 पुलिसकर्मी, एनडीआरएफ के 27, एसडीआरएफ के 42, डीआरएफ के 4 और फायर सर्विस के 9 लोग मौके पर तैनात थे। सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें गौचर और जोशीमठ से भी घटनास्थल के लिए रवाना की गईं।

5 साल पहले हुआ था तपोवन टनल हादसा

7 फरवरी 2021 को तपोवन टनल में भी ऐसा ही हादसा हुआ था। चमोली जिले में आई भीषण बाढ़ ने तपोवन-विष्णुगाड़ जलविद्युत परियोजना की सुरंगों को भारी मलबे और पानी से भर दिया था।
ऋषिगंगा नदी के ऊपरी कैचमेंट में एवलांच के बाद पानी और मलबे का सैलाब आया। इससे ऋषिगंगा और धौलीगंगा नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा। सैलाब ने NTPC की निर्माणाधीन 520 MW तपोवन-विष्णुगाड हाइड्रोपावर परियोजना को बुरी तरह प्रभावित किया।

सरकारी रिकॉर्ड में कुल 204 लोगों के लापता होने का आंकड़ा दर्ज हुआ। 23 मार्च 2021 तक 80 लोगों के शव बरामद किए जा चुके थे, जिनमें 16 तपोवन टनल से मिले थे। टनल से मिले कुछ शवों की मेडिकल जांच में डूबने के कारण दम घुटना बताया गया; शवों के फेफड़ों और पेट में पानी तथा मलबा मिला था।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज बड़वानी में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान में होंगे शामिल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज बड़वानी में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान में होंगे शामिल

 जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम में जन शिकायतों के निराकरण की करेंगे समीक्षा

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज शुक्रवार को बड़वानी में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान में शामिल होंगे। मुख्यमंत्री यहां कलेक्टरेट सभागृह में आयोजित जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आम जनता की विभिन्न शिकायतों और आवेदनों के निराकरण की गहन समीक्षा करेंगे।

इस संपूर्ण कार्यवाही का संचालन सीएम हेल्पलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा। राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आम जनता की समस्याओं का शत-प्रतिशत समाधान करना, शासकीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, निरंतर मॉनिटरिंग और लोक सेवाओं को निर्धारित समय-सीमा में प्रदान करना है।

जनसम्पर्क अधिकारी प्रियंका रानी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बोरलाय का निरीक्षण करेंगे। यहाँ वे जिले के पहले मैथ्स पार्क, आईसीटी लैब, अटल टिंकरिंग लैब और स्मार्ट क्लास का अवलोकन कर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। साथ ही, जिला कलेक्टर कार्यालय परिसर में उद्यमियों, प्रगतिशील कृषको एवं जिले के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों से संवाद भी करेंगे।

प्रगतिशील कृषको से मुख्यमंत्री करेंगे चर्चा

संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिले में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन एवं मत्स्य पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रगतिशील कृषकों से चर्चा करेंगे। साथ ही जिले में एचडीपीएस तकनीक से लगाये गये कपास की खेती, कस्टम हायरिंग सेंटर, एफपीओ, शासन की विभिन्न योजना से ऋण लेकर खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उद्योग स्थापित करने वाले हितग्राही, दुग्ध उत्पादन, निमाड़ी गायो के संरक्षण, मछली बीज एवं मछली पालन पर किसानों से संवाद करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव किसान संगठनों के पदाधिकारियों से भी ई-टोकन व्यवस्था सहित अन्य विषयों पर भी चर्चा करेंगे।

उद्यमियों से भी होगा संवाद

मुख्यमंत्री डॉ. यादव संवाद कार्यक्रम में जिले में खाद्य प्रसंस्करण एवं एग्रो इण्डस्ट्रीज, कपास एवं जिनिंग उद्योग, रिन्यूएबल उर्जा, वेस्ट मैनेजमेंट, इको फ्रेण्डली उत्पाद, विनिर्माण एवं नवाचार, स्टार्ट-अप के क्षेत्र में कार्य करने वाले सफल उद्यमियों से उनके कार्यक्षेत्र के संबंध में विस्तार से संवाद करेंगे।

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रात: 11.45 बजे इंदौर एयरपोर्ट पर आएंगे। यहां से वे 11.50 बजे हेलिकॉप्टर द्वारा बड़वानी के लिए रवाना होंगे। वे बड़वानी जिले में आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद शाम 5.35 बजे प्रस्थान कर इंदौर एयरपोर्ट आएंगे। यहां से वे शाम 6.20 बजे वायुयान द्वारा भोपाल के लिए रवाना होंगे।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त कर रहा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान : अमित शाह

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त कर रहा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान : अमित शाह

 केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने देश के नागरिकों से अभियान में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने और अपने घरों पर तिरंगा फहराकर देशभक्ति का जश्न मनाने की अपील की। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान देशवासियों के मन में राष्ट्रप्रेम और गौरव की भावना को मजबूत कर रहा है।

तिरंगा एकता और गौरव का प्रतीक

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि तिरंगा देश के प्रति गर्व और एकता की ताकत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि करोड़ों देशवासी तिरंगे के साथ जुड़कर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को सशक्त कर रहे हैं।

देशवासियों से अभियान में शामिल होने की अपील

गृह मंत्री ने देश के हर नागरिक से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में लाखों अन्य लोगों के साथ जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग अपने घरों पर तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशभक्ति का जश्न मनाएं और राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान एवं गौरव की भावना को मजबूत करें।

सेल्फी अपलोड करने का भी आग्रह

अमित शाह ने नागरिकों से अभियान के तहत तिरंगे के साथ अपनी सेल्फी लेकर उसे harghartiranga.com पर अपलोड करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए अधिक से अधिक लोगों को अभियान से जोड़कर राष्ट्रप्रेम की भावना को व्यापक स्तर पर मजबूत किया जा सकता है।

‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को बढ़ावा

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान अब देशभर में नागरिकों की भागीदारी का माध्यम बन गया है। तिरंगे के साथ जुड़कर करोड़ों देशवासी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत कर रहे हैं। उन्होंने देशवासियों से अभियान को जनभागीदारी का व्यापक रूप देने का आह्वान किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आज राष्ट्र को करेंगी संबोधित

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आज राष्ट्र को करेंगी संबोधित

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आज (शुक्रवार, 14 अगस्त 2026) राष्ट्र को संबोधित करेंगी। राष्ट्रपति का संबोधन शाम 7 बजे से आकाशवाणी के पूरे राष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रसारित किया जाएगा। दूरदर्शन के सभी चैनलों पर राष्ट्रपति का संबोधन पहले हिंदी और उसके बाद अंग्रेजी में प्रसारित होगा।

क्षेत्रीय भाषाओं में भी होगा प्रसारण

दूरदर्शन पर हिंदी और अंग्रेजी में संबोधन के प्रसारण के बाद उसके क्षेत्रीय चैनलों के माध्यम से राष्ट्रपति के संबोधन को क्षेत्रीय भाषाओं में भी प्रसारित किया जाएगा। इसके जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग अपनी-अपनी भाषाओं में राष्ट्रपति का संदेश सुन सकेंगे।

आकाशवाणी पर रात 9:30 बजे क्षेत्रीय संस्करण

आकाशवाणी भी अपने संबंधित क्षेत्रीय नेटवर्क पर रात 9:30 बजे राष्ट्रपति के संबोधन के क्षेत्रीय भाषा वाले संस्करण प्रसारित करेगा। इस तरह राष्ट्रपति का स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या का संदेश राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दोनों स्तरों पर व्यापक रूप से लोगों तक पहुंचाया जाएगा।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश को संबोधन

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति का राष्ट्र के नाम संबोधन देश के लिए महत्वपूर्ण संदेश माना जाता है। इस संबोधन में राष्ट्रपति देश की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की दिशा से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार रख सकती हैं।

शिवराज सिंह चौहान और प्रल्हाद जोशी आज पंजाब-हरियाणा दौरे पर, CBDC आधारित DBT की करेंगे शुरुआत

शिवराज सिंह चौहान और प्रल्हाद जोशी आज पंजाब-हरियाणा दौरे पर, CBDC आधारित DBT की करेंगे शुरुआत

 केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय शिक्षा, उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी 14 अगस्त को पंजाब और हरियाणा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) व्यवस्था की शुरुआत की जाएगी। इसके अलावा किसान संवाद और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साइलो के निरीक्षण के जरिए खाद्यान्न भंडारण, गुणवत्ता प्रबंधन और सप्लाई चेन की भी समीक्षा होगी।

चंडीगढ़ में CBDC आधारित DBT की शुरुआत

शिवराज सिंह चौहान 14 अगस्त को सुबह दिल्ली से चंडीगढ़ पहुंचेंगे। सुबह 11 बजे टैगोर थिएटर में पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत आयोजित कार्यक्रम में वह CBDC आधारित DBT व्यवस्था का शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम में प्रल्हाद जोशी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्यमंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभणिया भी कार्यक्रम में शामिल होंगी।

PDS में पारदर्शिता और समयबद्धता पर जोर

CBDC आधारित DBT व्यवस्था का उद्देश्य सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत अनाज और अन्य लाभों से जुड़े भुगतान को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और समयबद्ध बनाना है। डिजिटल करेंसी आधारित व्यवस्था के जरिए लाभार्थियों तक सरकारी सहायता पहुंचाने की प्रक्रिया में तकनीकी पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

अजीजपुर में किसानों से सीधा संवाद

चंडीगढ़ कार्यक्रम के बाद दोनों केंद्रीय मंत्री दोपहर 2 बजे अजीजपुर गांव में किसानों से सीधा संवाद करेंगे। इस दौरान किसानों से खेती-किसानी से जुड़े मुद्दों, सरकारी योजनाओं और उनके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर सीधे फीडबैक लिया जाएगा। केंद्र सरकार का उद्देश्य किसानों से मिले फीडबैक के आधार पर नीतियों और योजनाओं को अधिक व्यावहारिक एवं किसान-केंद्रित बनाना है।

हर राज्य में किसानों से संवाद पर जोर

शिवराज सिंह चौहान अपने विभिन्न राज्यों के दौरों के दौरान किसानों से सीधे संवाद करते रहे हैं। इस दौरान किसानों की स्थानीय जरूरतों, कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाती है। अजीजपुर में होने वाले संवाद को भी इसी क्रम का हिस्सा माना जा रहा है।

धांड में FCI साइलो का निरीक्षण

दोपहर 4:30 बजे केंद्रीय मंत्री हरियाणा के कैथल जिले के धांड स्थित भारतीय खाद्य निगम (FCI) के साइलो का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान खाद्यान्न भंडारण क्षमता, अनाज की गुणवत्ता बनाए रखने की व्यवस्था और आधुनिक साइलो प्रणाली की समीक्षा की जाएगी। दोनों मंत्री खाद्यान्न की सप्लाई चेन की स्थिति का भी जायजा लेंगे।

वैज्ञानिक भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने पर फोकस

FCI साइलो के निरीक्षण के दौरान खाद्यान्न के आधुनिक और वैज्ञानिक भंडारण से जुड़े पहलुओं पर चर्चा होगी। इसके साथ ही राज्यों में खाद्यान्न की आपूर्ति और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत अनाज वितरण को अधिक सुव्यवस्थित बनाने के उपायों की समीक्षा की जाएगी। दौरे के दौरान भंडारण क्षमता और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर भी जोर रहेगा। 

विभाजन विभीषिका अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की स्मृति है: राजनाथ सिंह

विभाजन विभीषिका अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की स्मृति है: राजनाथ सिंह

 रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आज शुक्रवार को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर भारत विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और विस्थापन का दंश झेलने वाले परिवारों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि यह दिवस देश के विभाजन की उस भयावह त्रासदी की याद दिलाता है, जिसने लाखों परिवारों के जीवन को गहरे दुख, विस्थापन और अनिश्चितता से भर दिया था।

रक्षामंत्री ने कहा कि भारत का विभाजन केवल इतिहास का एक पीड़ादायक अध्याय नहीं है, बल्कि यह उन अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की भी स्मृति है, जिन्होंने उस कठिन दौर में अपना घर-परिवार, संपत्ति और अपने प्रियजनों को खो दिया। इसके बावजूद उन्होंने अपने जीवन को दोबारा संवारने और आगे बढ़ने का संकल्प दिखाया।

उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी में विस्थापित हुए लोगों ने बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना किया। अपने घर और जन्मभूमि से दूर जाकर उन्हें नए सिरे से जीवन शुरू करना पड़ा। अनेक परिवारों ने अपनों को खोया, लेकिन विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और देश के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। राजनाथ सिंह ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि इतिहास से सीख लेने का भी दिन है। इतिहास की पीड़ाओं को केवल स्मृति में संजोकर रखना पर्याप्त नहीं है। उनसे सबक लेकर ऐसा मजबूत, समरस और संवेदनशील भारत बनाना जरूरी है, जहां विभाजन जैसी त्रासदी का दंश भविष्य में किसी समाज को दोबारा न झेलना पड़े।

रक्षामंत्री ने देशवासियों से इतिहास के इस दुखद अध्याय को याद करते हुए एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनशीलता को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी, उनका बलिदान देश हमेशा याद रखेगा। साथ ही, अपनी जन्मभूमि और जड़ों से विस्थापित होने वाले अनगिनत परिवारों का संघर्ष भी भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “देश के विभाजन की विभीषिका में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात लोगों तथा अपनी जन्मभूमि और जड़ों से विस्थापित होने वाले अनगिनत परिवारों के प्रति मेरी विनम्र श्रद्धांजलि।” विभाजन की पीड़ा को याद करना वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद करता है कि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव को बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। यह दिवस भारत को एक ऐसे राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है, जहां विविधताओं के बावजूद समाज में आपसी विश्वास, भाईचारा और एकता कायम रहे।

उन्होंने कहा, “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ हमें भारत के विभाजन की त्रासदी का स्मरण कराता है, जिसने लाखों परिवारों के जीवन को गहरे दुख, विस्थापन और अनिश्चितता से भर दिया। यह केवल इतिहास का एक पीड़ादायक अध्याय नहीं, बल्कि उन अनगिनत लोगों के संघर्ष, साहस, त्याग और धैर्य की स्मृति भी है, जिन्होंने अपना घर-परिवार, संपत्ति और स्वजनों को खोने के बावजूद, जीवन को पुन: संवारने का संकल्प दिखाया।

बाजार में आने वाले हैं 10 और 20 रुपये के ‘प्लास्टिक नोट, नई दिल्ली में होगी कागज के नोटों की छुट्टी सरकार ने दी हरी झंडी

बाजार में आने वाले हैं 10 और 20 रुपये के ‘प्लास्टिक नोट, नई दिल्ली में होगी कागज के नोटों की छुट्टी सरकार ने दी हरी झंडी

 नई दिल्ली । भारत में मुद्रा प्रणाली को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने 10 रुपए और 20 रुपए के पॉलीमर बैंक नोटों के फील्ड ट्रायल को मंजूरी दे दी है। मंगलवार को संसद को दी गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने दोनों मूल्यवर्गों में एक-एक अरब (100 करोड़) पॉलीमर नोट जारी करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपने केंद्रीय निदेशक मंडल की सिफारिश के आधार पर आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 25 के तहत यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था। इस प्रस्ताव में फील्ड ट्रायल के बाद सफल परिणाम मिलने पर इन मूल्यवर्गों में पॉलीमर नोटों को नियमित रूप से जारी करने की भी योजना शामिल है।
वित्त मंत्री ने कहा, सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आरबीआई के अनुसार, इन पॉलीमर बैंक नोटों को मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ समानांतर रूप से जारी करने का प्रस्ताव है

पॉलीमर नोटों की आयु कागजी नोटों की तुलना में अधिक होती है, जिससे बार-बार नोट छापने की आवश्यकता कम होती है। इसके अलावा इनमें उन्नत सुरक्षा विशेषताएं जोडऩा भी आसान होता है, जिससे नकली नोटों पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।
निर्मला सीतारमण ने संसद को बताया कि आरबीआई की ओर से सरकार को सूचित किया गया है कि इन नोटों के लिए आवश्यक खरीद प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। इसलिए फिलहाल यह बताना संभव नहीं है कि पॉलीमर नोटों को आम जनता के बीच कब तक जारी किया जाएगा और इस पूरी परियोजना पर कितना खर्च आएगा।

इस महीने की शुरुआत में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पॉलीमर नोटों का पायलट प्रोजेक्ट अभी जारी है।

पॉलीमर नोटों पर अभी परीक्षण चल रहा है। बाजार में लाने से पहले इन नोटों की पूरी तरह जांच की जाएगी।
इस दौरान, आरबीआई गवर्नर ने यह भी संकेत दिया कि केंद्रीय बैंक फील्ड ट्रायल के नतीजों का विस्तृत मूल्यांकन करने के बाद ही व्यापक स्तर पर इनके प्रचलन को लेकर अंतिम फैसला करेगा।संजय मल्होत्रा के अनुसार, आरबीआई का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027-28 तक पॉलीमर नोटों को प्रचलन में लाना है। यदि ट्रायल सफल रहता है, तो यह भारतीय मुद्रा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए गौरव का पल, राष्ट्रपति पदक से सम्मानित होंगे 12 अधिकारी-कर्मचारी, देखें नाम

छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए गौरव का पल, राष्ट्रपति पदक से सम्मानित होंगे 12 अधिकारी-कर्मचारी, देखें नाम

 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गणतंत्र दिवस के मौके पर छत्तीसगढ़ पुलिस के 12 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशिष्ट सेवा पदक और सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित करने की घोषणा की थी।

अब इन पदकों को 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर रायपुर में आयोजित मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. विष्णुदेव साय प्रदान करेंगे।

विशिष्ट सेवाओं के लिए रामावतार सिंह राजपूत, सहायक उप निरीक्षक, रक्षित केंद्र जिला धमतरी को राष्ट्रपति पदक प्रदान किया जाएगा। वहीं, सराहनीय सेवाओं के लिए 11 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा।

इन अधिकारियों को मिलेगा सराहनीय सेवा पदक

  • रामगोपाल गर्ग – पुलिस महानिरीक्षक, बिलासपुर रेंज
  • शशिमोहन सिंह – वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जिला रायगढ़
  • श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा – पुलिस अधीक्षक, रायपुर ग्रामीण
  • राजश्री मिश्रा – पुलिस अधीक्षक, एटीएस, पुलिस मुख्यालय रायपुर
  • निवेदिता पाल – सेनानी, 6वीं वाहिनी छसबल, रायगढ़
  • मनीषा ठाकुर रावटे – सेनानी, 20वीं वाहिनी छसबल, महासमुंद
  • तारकेश्वर पटेल – अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त, जिला पुलिस, मध्य पुलिस आयुक्त, रायपुर नगरीय
  • उनैजा खातून अंसारी – अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, पुलिस मुख्यालय रायपुर
  • जयलाल मरकाम – सहायक सेनानी, प्रथम वाहिनी छसबल, भिलाई
  • हजारी लाल साहू – प्लाटून कमांडर, 20वीं वाहिनी छसबल, महासमुंद

राष्ट्रपति पदक से सम्मानित होने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह में पदक प्रदान किए जाएंगे। रायपुर में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. विष्णुदेव साय उन्हें सम्मानित करेंगे। इन पदकों के जरिए पुलिस सेवा में विशिष्ट और सराहनीय योगदान देने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के कार्यों को सम्मान दिया जाएगा।

देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं कलाकार: मुर्मु

देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं कलाकार: मुर्मु

नयी दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को यहां देश के प्रतिष्ठित कलाकारों को वर्ष 2024 और 2025 के लिए संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप तथा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किए और कहा कि भारतीय परंपरा के वाहक ये कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं।

मुर्मु ने कहा कि सम्मानित किए गए कलाकार मिलकर देश का ऐसा सांस्कृतिक मानचित्र प्रस्तुत करते हैं जिसमें इस देश की मिट्टी की कथाएं और गीत जुड़े हैं, ऐसा मानचित्र जिसमें विविधता से भरी इस धरती के नृत्य और उत्सव समाए हैं और सदियों से विकसित हुई इसकी भाषाओं और बोलियों की यादें समाई हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की संस्कृति जड़ों से जुड़ी हुई है।
अलग-अलग खान-पान, वेषभूषा, नृत्य और संगीत, प्रकृति से प्रेरित हैं।
चहकते हुए चिड़ियों से, कल-कल बहते झरनों से, पेड़-पत्तों से, बादलों से, नदियों से प्रेरणा लेकर कलाकार अपने नृत्य और संगीत को प्रदर्शित करते हैं।
विविधता और एकता का यह संगम हमारी कलाओं की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है।

मुर्मु ने कहा कि सभी विभिन्न कला शैलियों में गुरु-शिष्य परंपरा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उन्होंने कहा, ” हमारी कलाओं की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तक जीवंत गुरु ही होते हैं।
आज के तेजी से बदलते दौर में हमारी बहुत सी लोक-कलाओं पर विलुप्त होने का संकट मंडरा रहा है।
ऐसी कला विधाओं का न केवल साक्ष्य और प्रमाण रखना जरूरी है बल्कि उन्हें जीवंत रखने के लिए विशेष प्रयास जरूरी हो जाते हैं।

उन्होंने कहा यह अच्छी बात है कि संगीत नाटक अकादमी इसी उद्देश्य से ‘कला-दीक्षा’ कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।
उन्होंने वरिष्ठ कलाकारों से कहा कि वे अगली पीढ़ी को तैयार करने के लिए योजनापूर्वक प्रयास करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि कला के संस्कार और समझ से जीवन को समृद्ध करने के लिए प्रकृति को सबसे सहज प्रशिक्षण संस्थान माना जाता है।
लोक और जनजातीय कलाओं में जीवन का स्वाभाविक उल्लास और प्रकृति के साथ गहरा संवाद दिखाई देता है।
इन कला रूपों में समुदाय की स्मृति और सामूहिक चेतना सहज रूप से व्यक्त होती है।
यही कारण है कि लोक कलाएं भारत की सांस्कृतिक पहचान का अत्यंत महत्त्वपूर्ण आधार हैं।

राष्ट्रपति ने पुरस्कार पाने वाले कलाकारों को बधाई दी और कहा कि भारतीय परंपरा के वाहक हमारे कलाकार देश की सामूहिक स्मृति के संरक्षक और भविष्य की कल्पना के सृजक हैं।

उन्होंने कहा कि संगीत नाटक अकादमी को भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अकादमी आने वाले समय में भी भारत की सांस्कृतिक ऊर्जा से समूचे विश्व को लाभान्वित करती रहेगी।

राहुल गांधी ने CBI-ED जांच के आदेश के खिलाफ खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, 17 अगस्त को सुनवाई

राहुल गांधी ने CBI-ED जांच के आदेश के खिलाफ खटखटाया सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा, 17 अगस्त को सुनवाई

 Rahul Gandhi Property Case : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के आरोपों की जांच से जुड़े इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। राहुल गांधी की याचिका पर 17 अगस्त को चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई करेगी।

यह मामला कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें राहुल गांधी पर आय से अधिक संपत्ति रखने का आरोप लगाया गया था।

मई में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि अगर संबंधित एजेंसियों को शिकायत मिली है तो उसमें लगाए गए आरोपों की कानून के मुताबिक जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने CBI और ED को कानूनी ढांचे के तहत उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र बताया था। अब राहुल गांधी ने इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

20 जुलाई को हुई सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने CBI की ओर से दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताया था। कोर्ट ने कहा था कि हलफनामे में उसके पहले दिए गए निर्देशों का ठीक से पालन नहीं किया गया। हाईकोर्ट ने ED की ओर से उठाए गए कदमों पर भी गौर किया था। कोर्ट ने कहा था कि सत्यापन या जांच के दौरान अगर कोई कार्रवाई योग्य जानकारी सामने आती है तो एजेंसी कानून के अनुसार आगे बढ़ सकती है।

CBI और ED के अलावा इलाहाबाद हाईकोर्ट की बेंच ने कई अन्य केंद्रीय विभागों को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। इनमें डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग, राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामलों का मंत्रालय और सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस के निदेशक शामिल हैं। यह मामला विग्नेश शिशिर की शिकायत के आधार पर आगे बढ़ा था। अब राहुल गांधी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से मामले की आगे की दिशा तय होगी।

राहुल गांधी की याचिका पर 17 अगस्त को चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई करेगी। राहुल गांधी की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट के जांच संबंधी निर्देशों को चुनौती दी गई है। अब नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है, जहां यह तय होगा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

स्वतंत्रता दिवस पर मोदी लाल किले पर फहरायेंगे तिरंगा, राष्ट्र को करेंगे संबोधित

स्वतंत्रता दिवस पर मोदी लाल किले पर फहरायेंगे तिरंगा, राष्ट्र को करेंगे संबोधित

  नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व करते हुए ऐतिहासिक लाल किले से राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद राष्ट्र को संबोधित करेंगे। इस भव्य समारोह में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150 साल पुरानी विरासत को याद करने और 2047 तक ‘विकसित भारत’ की ओर देश की यात्रा को आगे बढ़ाने में ‘युवा शक्ति’ की ऊर्जा, आकांक्षाओं और अहम योगदान का जश्न मनाया जायेगा।

इसी कड़ी में स्वतंत्रता दिवस पर पहली बार, लाल किले पर ‘वंदे मातरम’ गाया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ और रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह लाल किला पहुंचने पर प्रधानमंत्री का स्वागत करेंगे। रक्षा सचिव, जनरल ऑफिसर कमांडिंग , दिल्ली एरिया लेफ्टिनेंट जनरल राजेश सेठी का परिचय प्रधानमंत्री से कराएंगे। इसके बाद ले. जनरल सेठी प्रधानमंत्री को सलामी मंच तक ले जाएंगे, जहां सेनाओं और दिल्ली पुलिस का संयुक्त दस्ता प्रधानमंत्री को सलामी देगा। इसके बाद प्रधानमंत्री सलामी गारद का निरीक्षण करेंगे।

सलामी गारद दल में सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस से एक-एक अधिकारी और 24-24 जवान शामिल होंगे। इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए भारतीय सेना समन्वय सेवा है। सलामी गारद की कमान लेफ्टिनेंट कर्नल अर्जुन सिंह संभालेंगे। प्रधानमंत्री के गार्ड में सेना के दल की कमान मेजर आदित्य शर्मा, नौसेना दल की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर नीलम राणा और वायु सेना दल की कमान स्क्वाड्रन लीडर विपिन कुमार संभालेंगे। दिल्ली पुलिस दल की कमान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार संभालेंगे।

सलामी गारद का निरीक्षण करने के बाद प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर की ओर बढ़ेंगे जहां रक्षा मंत्री , रक्षा राज्य मंत्री , प्रमुख रक्षा अध्यक्ष एनएस राजा सुब्रमणि, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन और सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ उनका स्वागत करेंगे। ले. जनरल सेठी प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्राचीर पर बने मंच तक ले जाएंगे। कैप्टन सोनिया सिंह चौहान राष्ट्रीय ध्वज फहराने में प्रधानमंत्री की मदद करेंगी।

यह 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के बहादुर गनर्स द्वारा दी जाने वाली 21-तोपों की सलामी के साथ तालमेल बिठाकर किया जाएगा। स्वदेशी 105 एमएम लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल करने वाली इस सेरेमोनियल बैटरी की कमान मेजर पवन सिंह शेखावत संभालेंगे और गन पोजीशन ऑफिसर नायब सूबेदार (गनरी में असिस्टेंट इंस्ट्रक्टर) अनुतोष सरकार होंगे।

सेना, नौसेना, वायु सेना और दिल्ली पुलिस के एक-एक अधिकारी और 32-32 अन्य रैंक के जवानों से बनी नेशनल फ्लैग गार्ड, प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के समय ‘राष्ट्रीय सलामी’ देगी। इस अंतर सेवा गार्ड और पुलिस गार्ड की कमान मेजर लोकेंद्र सिंह शेखावत संभालेंगे। राष्ट्रीय फ्लैग गार्ड में सेना की टुकड़ी की कमान मेजर विकास यादव, नौसेना की टुकड़ी की कमान लेफ्टिनेंट कमांडर अभिलाष और वायु सेना की टुकड़ी की कमान स्क्वाड्रन लीडर उमेश जी संभालेंगे। दिल्ली पुलिस की टुकड़ी की कमान अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त विकास मीणा संभालेंगे।

ध्वज फहराए जाने के बाद, तिरंगे को ‘राष्ट्रीय सलामी’ दी जाएगी। एक जेसीओ और 25 अन्य रैंक के जवानों वाला सेना बैंड ‘वंदे मातरम’ की धुन बजाएगा और लाल किले पर मौजूद सभी लोग राष्ट्रगीत गाएंगे। इसके बाद राष्ट्रगान गाया जाएगा। बैंड का संचालन सूबेदार ईश्वर सिंह करेंगे। जैसे ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे वायु सेना के दो एमआई-17 हेलीकॉप्टर कार्यक्रम स्थल पर फूलों की वर्षा करेंगे – एक हेलीकॉप्टर राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा ‘वंदे मातरम’ वाला ध्वज लेकर उड़ेगा। हेलीकॉप्टरों के कैप्टन विंग कमांडर रजत और स्क्वाड्रन लीडर अंकित वार्ष्णेय होंगे।

पुष्प वर्षा के बाद, प्रधानमंत्री देश को संबोधित करेंगे।
उनके भाषण के समापन पर, राष्ट्रीय कैडेट कोर के कैडेट और ‘माई भारत’ के स्वयंसेवक राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ गाएंगे और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। इस समारोह में कुल 2,500 लड़के और लड़कियां (थल सेना, नौसेना और वायु सेना के कैडेट) और ‘माई भारत’ के स्वयंसेवक भाग लेंगे। ये कैडेट और ‘माई भारत’ के स्वयंसेवक ज्ञानपथ पर, प्राचीर के सामने बैठेंगे। वे ‘वंदे मातरम’ की आकृति बनाएंगे। ज्ञानपथ पर ‘विकसित भारत 2047’ की थीम को दर्शाने वाले व्यू-कटर लगाए जाएंगे।

समारोह को देखने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों से लगभग 5,000 खास मेहमानों को बुलाया गया है। इसके अलावा अलग-अलग राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से पारंपरिक कपड़ों में 1,500 से ज़्यादा लोगों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। गणतंत्र दिवस की तर्ज पर इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर भी दर्शकों के लिए छह जगहों पर 25 क्लॉक रूम बनाए गए हैं। दर्शकों की मदद के लिए 200 स्वयंसेक तैनात किये जायेंगे और अक्षम लोगों तथा बुर्जुगों को व्हीलचेयर की सुविधा दी जायेगी इसके लिए मेट्रो स्टेशनों और पार्किंग में एनसीसी कैडेट मौजूद रहेंगे।

इस वर्ष के निमंत्रण कार्ड पर ‘सेवा तीर्थ’ और ‘धर्म चक्र’ की झलक दिखाई गई है।

समारोह में बनायी गयी बैठने की जगहों के नाम देश की प्रमुख झीलों के नाम पर रखे गए हैं। इनमें बड़खल, भीमताल, चंद्रताल, चिल्का, दलपत सागर, डिमना, दूधसागर, हाफलोंग, हरिके, हुसैन सागर, कंवर, कांकरिया, कोलेरू, लोकटक, लोनार, पैंगोंग त्सो, पुलिकट, पुष्कर, रवीन्द्र सरोबर, रामगढ़ ताल, रुद्रसागर, साख्य सागर, शांति सागर, वेम्बनाड और वुलर शामिल हैं।

वंदे मातरम् का अपमान अब पड़ेगा भारी, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया कानून

वंदे मातरम् का अपमान अब पड़ेगा भारी, राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू हुआ नया कानून

 नई दिल्ली। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम् को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन अधिनियम, 2026 प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही राष्ट्रगीत को विशेष कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान लागू हो गया है। संशोधित कानून के तहत जानबूझकर ‘वंदे मातरम्Ó के गायन को रोकना या उसके दौरान व्यवधान पैदा करना दंडनीय अपराध माना जाएगा। ऐसे उल्लंघन के लिए तीन वर्ष तक की सजा, जुर्माना या दोनों का प्रावधान किया गया है।

अब तक ‘वंदे मातरम्Ó को देश में राष्ट्रगीत के रूप में महत्वपूर्ण संवैधानिक और सांस्कृतिक सम्मान प्राप्त था, लेकिन इसके अपमान या इसके गायन में जानबूझकर बाधा डालने के खिलाफ स्पष्ट वैधानिक व्यवस्था राष्ट्रगान के मामले जैसी नहीं थी। नए संशोधन के बाद राष्ट्रगीत को भी कानून के दायरे में विशेष सुरक्षा प्रदान की गई है। इसका उद्देश्य ऐसे जानबूझकर किए जाने वाले कृत्यों पर रोक लगाना है, जिनसे राष्ट्रगीत के गायन में बाधा पहुंचती हो या उसका अपमान होता हो।

राष्ट्रपति की मंजूरी किसी विधेयक को कानून का रूप देने की संवैधानिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। संशोधित कानून लागू होने के बाद ‘वंदे मातरम्Ó के सार्वजनिक गायन और उससे जुड़े मामलों में कानूनी कार्रवाई का आधार अधिक स्पष्ट हो गया है। कानून के प्रावधानों को लेकर यह समझना जरूरी है कि इसका मुख्य जोर जानबूझकर अपमान, गायन रोकने या व्यवधान पैदा करने जैसे कृत्यों पर है। इसलिए किसी मामले में अपराध निर्धारित करने के लिए घटना की परिस्थितियों, संबंधित व्यक्ति की मंशा और कानून में निर्धारित शर्तों को देखा जाएगा।

इसका अर्थ यह नहीं है कि ‘वंदे मातरम्Ó से जुड़ा हर मतभेद या व्यक्तिगत प्रतिक्रिया अपने आप आपराधिक कृत्य बन जाएगी। किसी मामले में कार्रवाई कानून की संबंधित धाराओं और न्यायिक व्याख्या के आधार पर होगी। ‘वंदे मातरम् की रचना महान साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठÓ का हिस्सा था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति और औपनिवेशिक शासन के विरोध का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘जन गण मनÓ को राष्ट्रगान के रूप में स्वीकार किया और ‘वंदे मातरम्Ó को भी समान सम्मान देने का निर्णय लिया। इसके बाद दोनों की राष्ट्रीय पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका स्थापित हुई। नए कानूनी प्रावधान के बाद राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को कानूनी संरक्षण के लिहाज से और करीब लाया गया है। हालांकि, दोनों की संवैधानिक स्थिति और उनसे जुड़े नियम एवं प्रोटोकॉल पूरी तरह समान नहीं हैं। नए प्रावधान का विशेष जोर ‘वंदे मातरम्Ó के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान डालने जैसे कृत्यों को दंडनीय बनाने पर है।

‘वंदे मातरम् को लेकर देश में समय-समय पर राजनीतिक और वैचारिक बहस होती रही है। हाल के घटनाक्रम में भी विभिन्न राजनीतिक दलों और नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नए कानून के लागू होने के बाद राष्ट्रगीत से जुड़े कानूनी अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सार्वजनिक आयोजनों में इसके इस्तेमाल को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है।

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद संशोधित कानून प्रभावी हो चुका है। अब किसी शिकायत के सामने आने पर पुलिस और प्रशासन इसके प्रावधानों के तहत किस प्रकार कार्रवाई करते हैं और अदालतें इन प्रावधानों की व्याख्या किस तरह करती हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।

कुल मिलाकर, संशोधन के बाद ‘वंदे मातरम्Ó को राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक विरासत के प्रतीक के साथ-साथ स्पष्ट कानूनी संरक्षण प्राप्त राष्ट्रगीत के रूप में सुरक्षा देने की व्यवस्था मजबूत हुई है। आने वाले समय में इसके व्यावहारिक इस्तेमाल से यह और स्पष्ट होगा कि किन परिस्थितियों में कानून के प्रावधान लागू किए जाते हैं।

Surya Grahan 2026: कल लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखाई देगा या नहीं

Surya Grahan 2026: कल लगेगा साल का आखिरी सूर्य ग्रहण, जानें भारत में दिखाई देगा या नहीं

 Surya Grahan 2026: साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण 12 अगस्त को होने जा रहा है। खगोलीय दृष्टि से यह ग्रहण बेहद खास माना जा रहा है, क्योंकि कई दशकों बाद ऐसा नजारा देखने को मिलेगा, जब सूर्य का बड़ा हिस्सा चंद्रमा की छाया में ढक जाएगा। ग्रहण के चरम पर कुछ क्षेत्रों में दिन के समय भी अंधेरा छाने जैसा अनुभव हो सकता है।

ग्रहण के दौरान चंद्रमा धीरे-धीरे सूर्य के सामने आएगा और सूर्य का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा ढक जाएगा। जैसे-जैसे सूर्य की रोशनी कम होगी, वातावरण में भी बदलाव महसूस किया जा सकता है। कुछ स्थानों पर तापमान में हल्की गिरावट आने की संभावना रहेगी। हालांकि, ग्रहण समाप्त होते ही स्थिति सामान्य हो जाएगी।

यूरोप और अटलांटिक क्षेत्र में दिखेगा शानदार नजारा

इस सूर्य ग्रहण को यूरोप के कई हिस्सों और उत्तरी अटलांटिक क्षेत्र से देखा जा सकेगा। ब्रिटेन, स्पेन, आइसलैंड और ग्रीनलैंड समेत कई इलाकों में लोग इस दुर्लभ खगोलीय घटना के गवाह बनेंगे। बताया जा रहा है कि वर्ष 1999 के बाद इस तरह का खास सूर्य ग्रहण देखने का अवसर मिल रहा है। वहीं, इसी तरह की अगली खगोलीय घटना के लिए लोगों को कई दशकों तक इंतजार करना पड़ सकता है। यही वजह है कि वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों के बीच इस ग्रहण को लेकर खास उत्साह है।

भारत में नहीं दिखाई देगा सूर्य ग्रहण

भारत में रहने वाले लोगों के लिए यह सूर्य ग्रहण देखने का मौका नहीं होगा। दरअसल, भारतीय समय के अनुसार ग्रहण की शुरुआत रात में होगी, जब देश के अधिकांश हिस्सों में सूर्य दिखाई नहीं देगा। भारतीय समयानुसार ग्रहण रात करीब 9:04 बजे शुरू होगा। पूर्ण ग्रहण की शुरुआत लगभग 10:29 बजे होगी और रात 11:16 बजे ग्रहण अपने मध्य चरण में पहुंचेगा। इसके बाद ग्रहण का समापन 13 अगस्त की रात करीब 1:27 बजे होगा।

भारत में सूतक काल को लेकर क्या है मान्यता?

सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां सूतक काल के नियम लागू नहीं माने जाएंगे। आमतौर पर सूतक काल को ग्रहण की दृश्यता से जोड़ा जाता है। इसलिए भारत में इस ग्रहण के दौरान सूतक और उससे जुड़े धार्मिक नियमों का पालन आवश्यक नहीं माना जाएगा।

Monsoon Session 2026: संसद में कई अहम बिलों पर मुहर, NCDC संशोधन बिल समेत कई प्रस्ताव पारित

Monsoon Session 2026: संसद में कई अहम बिलों पर मुहर, NCDC संशोधन बिल समेत कई प्रस्ताव पारित

 Monsoon Session 2026:  20 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसूत्र का आज 17वां दिन रहा। सत्र के अब सिर्फ दो तीन दिन ही बचे हैं, 13 अगस्त को सत्र का आखिरी दिन है। ऐसे में आज का दिन काफी अहम माना जा रहा है। संसद के मानसून सत्र के दौरान आज मंगलवार को कई महत्वपूर्ण विधायी मुद्दों पर कार्यवाही आगे बढ़ी। संसद के मानसून सत्र में कई अहम विधेयक पारित हुए. ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ और ‘नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (संशोधन) विधेयक, 2026’ लोकसभा से पास हो गए। वहीं ‘ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026’ को राज्यसभा में विचार और पारित करने के लिए लिया गया।

NCDC के अधिकार क्षेत्र का होगा विस्तार

सरकार ने सोमवार को लोकसभा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करना है। विपक्षी सदस्यों के हंगामे के बीच, सहकारिता राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने यह विधेयक पेश किया।

नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी NCDC एक वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना वर्ष 1963 में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम अधिनियम, 1962 के तहत की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सहकारी क्षेत्र से जुड़े कृषि उत्पादों, खाद्य वस्तुओं और अन्य अधिसूचित उत्पादों के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण तथा आयात-निर्यात से संबंधित योजनाओं को बढ़ावा देना और उन्हें वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।

प्रस्तावित संशोधन के जरिए NCDC की भूमिका और कार्यक्षेत्र को व्यापक बनाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत संस्था की जिम्मेदारी केवल सहकारी समितियों के माध्यम से चलने वाली योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सहकारी विकास से जुड़े व्यापक कार्यक्रमों को भी इसके दायरे में शामिल किया जाएगा।

सीधे ऋण और अनुदान देने का प्रस्ताव

संशोधन विधेयक में NCDC को सहकारी समितियों के अलावा सहकारी विकास से संबंधित संस्थानों को भी सीधे ऋण और अनुदान उपलब्ध कराने की शक्ति देने का प्रावधान है। हालांकि, इस वित्तीय सहायता का इस्तेमाल निर्धारित सहकारी उद्देश्यों के लिए ही किया जाना होगा। विधेयक में कहा गया है कि जून 2021 में अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन और सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के बाद NCDC की भूमिका पहले की तुलना में काफी बढ़ी है। इसी बदलती जरूरत को ध्यान में रखते हुए इसके अधिकार क्षेत्र में विस्तार का प्रस्ताव रखा गया है।

केरल के नाम से जुड़ा विधेयक भी पास

लोकसभा ने ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को भी पारित कर दिया। यह विधेयक राज्य के नाम से संबंधित बदलाव के प्रस्ताव से जुड़ा है। इसके पारित होने के साथ ही विधायी प्रक्रिया में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है।

राज्यसभा में ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल पर चर्चा

उधर, राज्यसभा में ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 को विचार और पारित करने के लिए लिया गया। विधेयक को लेकर सदन में आगे की चर्चा और प्रक्रिया जारी रहने की संभावना है। सदन की कार्यवाही के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्षी दलों से सदन सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि विपक्ष की दोनों प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया गया है और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छात्रों से जुड़े मुद्दे पर होने वाली चर्चा में हिस्सा लेंगे।

बता दें कि, ट्रिब्यूनल ऐसी संस्था होते हैं जो अदालतों की तरह विवादों का निपटारा करते हैं। इनके कामकाज को स्वतंत्र और पारदर्शी तथा प्रभावी बनाने के लिए ही सरकार ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स बिल लाई है. इस कानून के पारित होने के बाद देश के 16 बड़े राष्ट्रीय ट्रिब्यूनलों में नियुक्ति तथा निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय ट्रिब्यूनल आयोग का गठन किया जाएगा।

मानसून सत्र के अंतिम दिनों में छात्रों के आंदोलन सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान जारी है। ऐसे में महत्वपूर्ण विधेयकों पर संसद की कार्यवाही के साथ-साथ आने वाले दिनों में सदन के भीतर राजनीतिक बहस भी तेज रहने के आसार हैं।

UGC-NET जून 2026 के अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर, इसी सप्ताह जारी होगी उत्तर कुंजी

UGC-NET जून 2026 के अभ्यर्थियों के लिए बड़ी खबर, इसी सप्ताह जारी होगी उत्तर कुंजी

 नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने यूजीसी-नेट जून 2026 परीक्षा के अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। एजेंसी के अनुसार, यूजीसी-नेट जून 2026 की अस्थायी उत्तर कुंजी (प्रोविजनल आंसर की) इसी सप्ताह आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की जाएगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के मुताबिक इसके साथ ही संयुक्त सीएसआईआर-यूजीसी नेट तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की एआईईईए-पीजी और एआईसीई-पीएचडी 2026 परीक्षाओं की प्रोविजनल आंसर की यानी उत्तर कुंजी भी जारी की जाएगी।  

एजेंसी ने सोमवार को जारी सार्वजनिक की गई एक सूचना में बताया कि उत्तर कुंजी जारी होने के बाद अभ्यर्थी अपने प्रश्नपत्र और उत्तरों के आधार पर उत्तर कुंजी की जांच कर सकेंगे। यदि किसी प्रश्न या उसके निर्धारित उत्तर को लेकर अभ्यर्थी को आपत्ति है, तो वह निर्धारित अवधि के दौरान आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इसके लिए छात्रों को आपत्ति दर्ज कराने का अवसर मिलेगा। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अस्थायी उत्तर कुंजी जारी किए जाने के साथ ही उत्तर कुंजी को चुनौती देने की प्रक्रिया और विस्तृत दिशा-निर्देश उपलब्ध कराए जाएंगे। 

अभ्यर्थियों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही अपनी आपत्तियां दर्ज करानी होंगी। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे उत्तर कुंजी जारी होने के बाद अपने उत्तरों का सावधानीपूर्वक मिलान करें। यदि कहीं भी किसी उत्तर पर आपत्ति हो तो ऐसी स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उत्तर को लेकर चुनौती प्रस्तुत करें। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने छात्रों से कहा है कि वे केवल आधिकारिक सूचना पर ही भरोसा करें। 

एजेंसी ने अभ्यर्थियों को सलाह दी है कि वे उत्तर कुंजी, आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया और परीक्षा से संबंधित अन्य जानकारी के लिए केवल राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। यहां मौजूद आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। एजेंसी की वेबसाइट पर परीक्षा से जुड़ी नवीनतम सूचनाएं लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं। यूजीसी-नेट के माध्यम से अभ्यर्थियों की सहायक प्रोफेसर के लिए पात्रता और कनिष्ठ अनुसंधान अध्येता के लिए पात्रता निर्धारित की जाती है। 

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के अनुसार, परीक्षा के लिए पात्रता और अन्य नियम संबंधित अधिसूचनाओं के अनुसार लागू होते हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने कहा है कि अस्थायी उत्तर कुंजी इसी सप्ताह जारी होने की संभावना है। हालांकि, अभी उत्तर कुंजी जारी करने की कोई निश्चित तारीख और आपत्ति की अंतिम तिथि घोषित नहीं की गई है।

पीएम पोषण योजना के तहत तीन साल में 76.27 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित

पीएम पोषण योजना के तहत तीन साल में 76.27 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित

 पीएम पोषण योजना के तहत देशभर में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए पिछले तीन वर्षों में 75 लाख मीट्रिक टन से अधिक खाद्यान्न आवंटित किया गया है। केंद्र सरकार योजना के तहत खाद्यान्न, परिवहन लागत तथा प्रबंधन, निगरानी एवं मूल्यांकन (एमएमई) की लागत के लिए 100% सहायता देती है, जबकि बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की समग्र जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की है। शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

2023-24 में 26.81 लाख मीट्रिक टन आवंटन

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पीएम पोषण योजना के तहत वर्ष 2023-24 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कुल 26,81,575.28 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित किया गया। वर्ष 2024-25 में यह मात्रा घटकर 25,31,266.40 मीट्रिक टन और वर्ष 2025-26 में 24,15,007.25 मीट्रिक टन रही। तीन वर्षों में कुल आवंटन 76,27,848.93 मीट्रिक टन रहा।

उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक खाद्यान्न

राज्यवार आंकड़ों में उत्तर प्रदेश को तीनों वर्षों में सबसे अधिक खाद्यान्न आवंटित किया गया। यूपी को 2023-24 में 3,46,423.21 मीट्रिक टन, 2024-25 में 3,09,093.88 मीट्रिक टन और 2025-26 में 2,97,399.06 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित हुआ। तीन वर्षों का कुल आवंटन 9,52,916.15 मीट्रिक टन रहा।

बिहार और पश्चिम बंगाल भी बड़े लाभार्थी

खाद्यान्न आवंटन के मामले में बिहार और पश्चिम बंगाल भी प्रमुख राज्यों में रहे। बिहार को 2023-24 में 3,11,304.40 मीट्रिक टन, 2024-25 में 3,24,227.06 मीट्रिक टन और 2025-26 में 3,01,148.29 मीट्रिक टन खाद्यान्न मिला। वहीं पश्चिम बंगाल को क्रमश: 2,92,433.20, 2,46,130.60 और 2,29,596.92 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित किया गया।

महाराष्ट्र, राजस्थान और मध्य प्रदेश को भी बड़ा आवंटन

महाराष्ट्र को तीन वर्षों में क्रमश: 2,62,489.28, 2,60,330.25 और 2,49,637.79 मीट्रिक टन खाद्यान्न आवंटित हुआ। राजस्थान को 1,71,793.46, 1,39,190.39 और 1,32,888.46 मीट्रिक टन तथा मध्य प्रदेश को 1,35,102.86, 1,25,971.57 और 1,30,864.22 मीट्रिक टन खाद्यान्न दिया गया।

एफसीआई की महत्वपूर्ण भूमिका

पीएम पोषण योजना के तहत खाद्यान्न भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाता है। एफसीआई की जिम्मेदारी अपने डिपो और उत्तर पूर्वी क्षेत्र में प्रधान वितरण केंद्रों पर पर्याप्त खाद्यान्न की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। निर्बाध आपूर्ति के लिए किसी माह या तिमाही के लिए एक माह पहले तक खाद्यान्न की ढुलाई की अनुमति दी जाती है।

गुणवत्ता की निगरानी के लिए व्यवस्था

एफसीआई योजना के तहत सर्वोत्तम उपलब्ध गुणवत्ता का खाद्यान्न जारी करता है, जो कम से कम उचित औसत गुणवत्ता (एफएक्यू) के मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। प्रत्येक राज्य में खाद्यान्न आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए एफसीआई ने नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। जिला स्तर पर भी संयुक्त निरीक्षण के बाद खाद्यान्न जारी किए जाने की व्यवस्था है। भविष्य में किसी शिकायत की स्थिति में सत्यापन और विश्लेषण के लिए खाद्यान्न के नमूने सुरक्षित रखे जाते हैं।

यूपी में लाखों बच्चों तक पहुंचा पोषण कार्यक्रम

उत्तर प्रदेश के जिलावार आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत राज्य में 2023-24 में बड़ी संख्या में बच्चों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया। लखीमपुर खीरी में 3,52,730, सीतापुर में 3,55,996, बहराइच में 2,96,075, प्रयागराज में 2,93,950 और हरदोई में 2,78,540 बच्चों का आंकड़ा दर्ज किया गया। इन जिलों में क्रमश: 10,001.737, 9,248.635, 7,143.958, 5,134.881 और 7,509.348 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया।

2025-26 में सीतापुर में सबसे अधिक वितरण

वर्ष 2025-26 में सीतापुर में 3,37,066 बच्चों के लिए 9,861.088 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया। लखीमपुर खीरी में 3,23,882 बच्चों के लिए 8,890.248 मीट्रिक टन और बहराइच में 3,05,547 बच्चों के लिए 7,491.588 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया गया। प्रयागराज में 2,70,213 बच्चों के लिए 7,132.633 मीट्रिक टन तथा हरदोई में 2,65,771 बच्चों के लिए 7,053.725 मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित हुआ।

निगरानी के लिए बहुस्तरीय तंत्र

पीएम पोषण योजना में निगरानी के लिए केंद्र से लेकर जिला स्तर तक कई व्यवस्थाएं हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में अधिकार प्राप्त समिति, सचिव स्तर पर कार्यक्रम अनुमोदन बोर्ड (पीएबी), मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संचालन-सह-निगरानी समिति और जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति इसके प्रमुख हिस्से हैं। दिशानिर्देशों में जिले के वरिष्ठतम सांसद की अध्यक्षता में समिति के जरिए त्रैमासिक निगरानी का भी प्रावधान है।

स्कूलों में सार्वजनिक की जाती है जानकारी

योजना में पारदर्शिता के लिए स्कूलों में पोषण संबंधी मानदंड प्रमुख स्थानों पर प्रदर्शित किए जाते हैं। इसके अलावा साप्ताहिक मेनू और उसमें इस्तेमाल सामग्री, प्राप्त और उपयोग किए गए खाद्यान्न की मात्रा, अन्य खरीदी और उपयोग की गई सामग्री, भोजन पाने वाले बच्चों की संख्या तथा कार्यक्रम में शामिल सामुदायिक सदस्यों की सूची भी साप्ताहिक या मासिक आधार पर प्रदर्शित की जाती है।

शिकायतों के निवारण के लिए टोल-फ्री सुविधा

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने जन शिकायतों के निवारण के लिए समर्पित तंत्र और टोल-फ्री कॉल सुविधा विकसित की है। इन व्यवस्थाओं का व्यापक प्रचार किया जाता है, ताकि योजना से जुड़े लाभार्थी और अन्य लोग खाद्यान्न की गुणवत्ता, भोजन की उपलब्धता अथवा योजना के संचालन से जुड़ी शिकायतों को संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकें।

बाल वाटिका से कक्षा 8 तक बच्चों को लाभ

पीएम पोषण योजना के तहत बाल वाटिका यानी कक्षा 1 से ठीक पहले के स्तर तथा सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों की कक्षा 1 से 8 तक पढ़ने वाले बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाता है। योजना का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के साथ-साथ स्कूलों में उनकी नियमित उपस्थिति और शिक्षा में सहभागिता को बढ़ावा देना है। 

खेलो इंडिया से बदली तस्वीर, पीएम मोदी बोले- खिलाड़ियों ने केवल पदक नहीं, एक पीढ़ी तैयार की

खेलो इंडिया से बदली तस्वीर, पीएम मोदी बोले- खिलाड़ियों ने केवल पदक नहीं, एक पीढ़ी तैयार की

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के राष्ट्रमंडल खेलों के चैंपियनों से बातचीत की और देश को गौरवान्वित करने के लिए उन्हें बधाई दी। इस दौरान उन्होंने पिछले एक दशक में भारतीय खेलों में आए बदलाव, खिलाड़ियों की उपलब्धियों, जमीनी स्तर पर खेल प्रतिभाओं को तैयार करने और देश में व्यापक खेल संस्कृति विकसित करने पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों के पदक स्कूलों में युवाओं को किसी भी मौखिक प्रोत्साहन से कहीं अधिक प्रेरित करते हैं और उन्हें भरोसा है कि भारतीय एथलीट भविष्य में भी देश के लिए जीत हासिल करते रहेंगे।

खिलाड़ियों से मुलाकात बनी नियमित परंपरा

प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय खेलों के बदलते परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि उनके करीब 12-13 साल के कार्यकाल के दौरान राष्ट्रीय खिलाड़ियों का उनके आवास पर स्वागत करना एक नियमित और प्रिय परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि देश के लिए लगातार जीत हासिल करने में भारतीय एथलीटों की मेहनत और सफलता युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का बड़ा माध्यम बन रही है। उन्होंने कहा, “आपका पदक उन्हें स्कूलों में जाकर जो कुछ भी कह सकता है, उससे कहीं अधिक प्रेरित करता है।”

बेटियों के खेल अपनाने पर जताया भरोसा

पीएम नरेंद्र मोदी ने एक एथलीट से बातचीत के दौरान उनकी बेटियों के खेल अपनाने और उनकी प्रगति से जुड़ी चर्चा की। एथलीट ने बताया कि उसने अपनी बेटियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है और उन्हें भरोसा है कि वे आगामी राष्ट्रमंडल खेलों में तीन पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाएंगी। प्रधानमंत्री ने उनके आत्मविश्वास की सराहना की और उत्कृष्टता के लिए उनके संकल्प को प्रोत्साहित किया।

चोट और मुश्किलों से उबरकर पोडियम तक पहुंचना प्रेरणादायक

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की भावनात्मक और संघर्षपूर्ण यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक खिलाड़ी का जिक्र किया, जिसने गुरु पूर्णिमा के दिन मिली जीत अपने कोच को समर्पित की। वहीं, एक अन्य एथलीट चार साल तक लगातार चोटों और व्यक्तिगत कठिनाइयों से जूझने के बाद पोडियम पर पहुंचा और राष्ट्रीय ध्वज को फहराते देखकर भावुक हो गया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह की जीत व्यक्तिगत उपलब्धि से आगे बढ़कर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्थायी स्रोत बन जाती है।

भारतीय खिलाड़ियों से दुनिया के प्रतिद्वंद्वी लेने लगे हैं चुनौती

पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय एथलीटों के बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों का कद लगातार बढ़ रहा है और अब दूसरे देशों के खिलाड़ी भारतीय प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ मुकाबले को गंभीर चुनौती के रूप में देखते हैं। उन्होंने खास तौर पर भारतीय मुक्केबाजों के बढ़ते दबदबे का जिक्र किया और खेलो इंडिया जैसी जमीनी पहलों तथा खिलाड़ियों को लगातार प्रतियोगिताओं के लिए मिलने वाली सहायता को इस बदलाव में महत्वपूर्ण बताया।

खेलो इंडिया से जुड़े रहें, सीखने की भावना बनाए रखें

प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से खेलो इंडिया पहल की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एथलीटों को उपलब्धियों के बावजूद सीखने वाले युवा की विनम्र भावना बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेलों को बढ़ावा देने का लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि देश में खेल के प्रति व्यापक संस्कृति तैयार करना भी है।

खेल का इन्फ्रास्ट्रक्चर ही काफी नहीं, खेल संस्कृति जरूरी

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि राष्ट्रीय खेलों की सफलता केवल भौतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने से सुनिश्चित नहीं होती। इसके लिए पूरे देश में खेल संस्कृति का निर्माण जरूरी है। उन्होंने कहा, “खेल का इन्फ्रास्ट्रक्चर एक बात है, लेकिन देश पदक तब हासिल करता है जब देश में एक खेल संस्कृति का निर्माण होता है।” उन्होंने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा बताया।

कारगिल विजय दिवस पर जीत को सेना को किया समर्पित

प्रधानमंत्री ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर पाकिस्तानी प्रतिद्वंद्वी को 5-0 से हराने वाले भारतीय सेना के एक एथलीट की देशभक्ति की भी सराहना की। खिलाड़ी ने अपनी जीत भारतीय सेना के वीरों को समर्पित की थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह का राष्ट्रीय गौरव खेल उपलब्धि को और विशेष बना देता है। बातचीत के दौरान उन्होंने सेना के कोच नरेंद्र राणा और साझा नाम ‘नरेंद्र’ से जुड़ा एक हल्का-फुल्का किस्सा भी सुनाया।

खिलाड़ियों ने नहीं, एक पूरी पीढ़ी ने हासिल की जीत

पीएम मोदी ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों को व्यापक प्रभाव से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने केवल पदकों की संख्या नहीं बढ़ाई, बल्कि एक पूरी पीढ़ी तैयार की है। उनके अनुसार, खिलाड़ियों की सफलता से देश के युवाओं में खेल के प्रति आकर्षण बढ़ता है और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की प्रेरणा मिलती है।

साई के सहयोग से स्थानीय केंद्रों से अंतरराष्ट्रीय पोडियम तक सफर

प्रधानमंत्री ने एक एथलीट की भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के प्रति कृतज्ञता की भी सराहना की। खिलाड़ी ने बताया कि साई की प्रशिक्षण सुविधाओं और सहयोग से स्थानीय खेल केंद्रों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पोडियम तक पहुंचने में मदद मिली। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ी की मेहनत की सराहना करते हुए उनके आभार को भी महत्व दिया।

वाराणसी, भोपाल समेत प्रशिक्षण केंद्रों पर चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने वाराणसी और भोपाल सहित विभिन्न क्षेत्रीय केंद्रों में उपलब्ध उन्नत खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर के बारे में खिलाड़ियों से जानकारी ली। खिलाड़ियों ने प्रशिक्षण के अनुभव साझा किए और उज्जैन, काशी विश्वनाथ तथा महाकालेश्वर जैसे आध्यात्मिक स्थलों की यात्राओं का भी उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने 2018 में स्थापना के बाद से साई और खेलो इंडिया ढांचे के जरिए मिल रहे निरंतर सहयोग की सराहना की।

भविष्य की जीत पर जताया भरोसा

पीएम नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से कहा कि उन्हें भविष्य में भी जीत का सिलसिला जारी रखने का भरोसा है। उन्होंने कहा, “निश्चिंत रहिए, भविष्य में भी आप विजयी होंगे और एक बार फिर हम यहीं मिलेंगे।” उन्होंने खिलाड़ियों को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपनी उपलब्धियों की गति बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

जन्मदिन पर पदक विजेता को दी शुभकामनाएं

बातचीत के दौरान कई बार पदक जीत चुके एक खिलाड़ी का जन्मदिन भी था। प्रधानमंत्री ने उन्हें हार्दिक शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया तथा व्यक्तिगत रूप से मिठाई देकर इस अवसर को खास बनाया। उन्होंने पूरे दल को लगातार तीसरी बार पदक जीतने के लिए शुभकामनाएं दीं और खेल की भावना को सफलता का आधार बताते हुए कहा, “जो खेलता है, वह खिलता है।

12 वर्षों में बदली भारत की विज्ञान गाथा, जैव अर्थव्यवस्था 190 अरब डॉलर पहुंची: जितेंद्र सिंह

12 वर्षों में बदली भारत की विज्ञान गाथा, जैव अर्थव्यवस्था 190 अरब डॉलर पहुंची: जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत के विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार परिदृश्य में अभूतपूर्व बदलाव आया है। जैव अर्थव्यवस्था के करीब 20 गुना विस्तार, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट ऐतिहासिक चंद्र लैंडिंग, अंतरिक्ष स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के तेज विकास, मौसम पूर्वानुमान में सुधार और रणनीतिक क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीकों के विकास ने भारत की वैज्ञानिक क्षमता को नई ऊंचाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विज्ञान और प्रौद्योगिकी अब प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन और देश की विकास यात्रा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।

विज्ञान और तकनीक बनी विकास यात्रा का प्रमुख स्तंभ

नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर मुख्यालय के एसएसबी सभागार में ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार में परिवर्तनकारी विकास के 12 वर्ष’ विषय पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार के लगभग सभी प्रमुख कार्यक्रम विज्ञान और प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र से निकलने वाली उभरती तकनीकों से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि नवाचार, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, उद्योग और निजी क्षेत्र की भागीदारी पर जोर देने से स्वास्थ्य, कृषि, अंतरिक्ष, मौसम विज्ञान, अवसंरचना और ऊर्जा सहित कई क्षेत्रों में वैज्ञानिक उपलब्धियों को गति मिली है।

10 अरब डॉलर से 190 अरब डॉलर हुई जैव अर्थव्यवस्था

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की जैव अर्थव्यवस्था 2014 में करीब 10 अरब डॉलर की थी, जो अब बढ़कर 190 अरब डॉलर से अधिक हो गई है। सरकार का लक्ष्य इसे 2030 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, जीनोमिक्स, निदान और जैव औषधि विज्ञान में स्वदेशी नवाचारों के जरिए भारत वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में उभर रहा है। बायोई3 ढांचे जैसी नीतियां इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

सीएआर-टी सेल थेरेपी और जीनोमिक्स में प्रगति

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने अगली पीढ़ी के एंटीबायोटिक्स, किफायती सीएआर-टी सेल थेरेपी, जीनोमिक्स और सटीक चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति की है। देश में विकसित हो रही तकनीकें घरेलू स्वास्थ्य चुनौतियों के साथ-साथ वैश्विक महत्व की बीमारियों और विकारों के समाधान में भी योगदान दे रही हैं।

सीएसआईआर का उद्योग और किसानों से बढ़ा जुड़ाव

जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएसआईआर में भी बड़ा बदलाव आया है और वैज्ञानिक संस्थान अब उद्योग, स्टार्टअप, किसानों तथा स्थानीय समुदायों के साथ पहले की तुलना में अधिक निकटता से काम कर रहे हैं। उन्होंने अरोमा मिशन का उदाहरण देते हुए कहा कि इस पहल ने नए आजीविका अवसर पैदा किए हैं और खासकर हिमालयी क्षेत्रों के हजारों किसानों को उच्च मूल्य वाली कृषि से जुड़ने में मदद मिली है।

स्टील कचरे से बनी सड़क तकनीक का उदाहरण

मंत्री ने स्टील के कचरे से सड़क निर्माण की तकनीक का उल्लेख करते हुए कहा कि विज्ञान ने औद्योगिक कचरे को मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन में बदलने का रास्ता दिखाया है। इस तकनीक से बनी सड़कों में बेहतर टिकाऊपन, कम रखरखाव लागत और अधिक लागत प्रभावशीलता देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि ऐसे उदाहरण बताते हैं कि वैज्ञानिक नवाचार सीधे आर्थिक विकास और सतत विकास में योगदान कर सकते हैं।

17 से बढ़कर 50 हुए मौसम रडार

मौसम एवं जलवायु सेवाओं में बदलाव का उल्लेख करते हुए जितेंद्र सिंह ने भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के कायापलट को पिछले 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने कहा कि 2014 में देश में सिर्फ 17 मौसम रडार थे, जबकि अब इनकी संख्या करीब 50 हो गई है। मिशन मौसम के तहत 50 और रडार लगाने की योजना है। इसके साथ बिजली गिरने का पता लगाने वाली प्रणालियों, पूर्वानुमान नेटवर्क और वर्षा निगरानी अवसंरचना का भी विस्तार हुआ है।

300 से बढ़कर 1,700 स्थानों तक पहुंचा मौसम पूर्वानुमान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौसम पूर्वानुमान सेवाओं का दायरा करीब 300 शहरों से बढ़कर लगभग 1,700 स्थानों तक हो गया है। नाउकास्ट जैसी आधुनिक सेवाएं स्थानीय स्तर पर अल्पकालिक और अधिक सटीक पूर्वानुमान उपलब्ध करा रही हैं। इससे नागरिकों, किसानों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को समय रहते बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि मौसम सेवाओं में सुधार से भारत की आपदा प्रबंधन क्षमता भी मजबूत हुई है।

अंतरिक्ष स्टार्टअप एकल अंक से बढ़कर 400 से अधिक

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में बदलाव का उल्लेख करते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि सुधारों के बाद अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में तेज विस्तार हुआ है। अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या पहले एकल अंक में थी, जो अब 400 से अधिक हो गई है। उन्होंने कहा कि करीब 8 अरब डॉलर की भारतीय अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के आने वाले वर्षों में 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। अंतरिक्ष क्षेत्र अब नवाचार और आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण चालक बन रहा है।

चंद्रयान-3 ने दुनिया के सामने दिखाई क्षमता

चंद्रयान-3 की सफलता को भारत की वैज्ञानिक क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट सफलतापूर्वक लैंडिंग करने वाला पहला देश बना। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने, संस्थागत सुधारों और उद्योग सहयोग ने नवाचार की गति तेज की है और भारतीय उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

2035 तक अंतरिक्ष स्टेशन, 2040 तक चंद्रमा पर लैंडिंग का लक्ष्य

जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अब भविष्य के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इनमें 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और 2040 तक चंद्रमा पर भारतीय लैंडिंग का लक्ष्य शामिल है। इसके साथ ही भविष्य के मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशनों के लिए भी तैयारियां जारी हैं।

परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी से बढ़ेंगे अवसर

केंद्रीय मंत्री ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने को हाल के वर्षों के महत्वपूर्ण नीतिगत सुधारों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस फैसले से देश और विदेश में काफी रुचि पैदा हुई है। इससे रणनीतिक ऊर्जा क्षेत्र में निवेश, नवाचार और क्षमता निर्माण को गति मिलने की उम्मीद है।

डीप ओशन मिशन और स्वदेशी समुद्री तकनीकों पर जोर

सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और सीएसआईआर की प्रमुख उपलब्धियों की जानकारी दी। इनमें मिशन मौसम के तहत मौसम अवलोकन प्रणालियों का विस्तार, डीप ओशन मिशन में प्रगति तथा मत्स्य 6000 और वराह जैसी स्वदेशी गहरे समुद्र की तकनीकों का विकास शामिल है। कृषि, स्वास्थ्य, अवसंरचना, ऊर्जा और ग्रामीण विकास में तकनीकों की तैनाती का भी उल्लेख किया गया।

क्वांटम मिशन से सुपरकंप्यूटिंग तक कई पहल

जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ. राजेश गोखले ने जैव प्रौद्योगिकी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभागों की उपलब्धियों को सामने रखा। इनमें बायोई3 नीति का कार्यान्वयन, स्टार्टअप और नवाचार नेटवर्क का विस्तार, जीनोमिक्स तथा स्वास्थ्य तकनीकों में प्रगति के साथ अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, अनुसंधान विकास और नवाचार (आरडीआई) कोष, राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन और राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति जैसी पहलें शामिल हैं।

विकसित भारत 2047 की दिशा में विज्ञान की भूमिका

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों की उपलब्धियां बताती हैं कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार भारत के वैश्विक ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने के प्रमुख कारक बन गए हैं। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति से रणनीतिक और तकनीकी क्षमताएं मजबूत होने के साथ नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार, रोजगार और विकास के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत विज्ञान और नवाचार की ताकत के साथ विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

शिवभक्ति में डूबा सावन, आज शिवरात्रि पर कांवड़ियों से लेकर श्रद्धालुओं तक हर कोई करेगा भोलेनाथ का अभिषेक, शिवालयों में गूंजेगा हर-हर महादेव

शिवभक्ति में डूबा सावन, आज शिवरात्रि पर कांवड़ियों से लेकर श्रद्धालुओं तक हर कोई करेगा भोलेनाथ का अभिषेक, शिवालयों में गूंजेगा हर-हर महादेव

 सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना और आस्था का पर्व बनकर एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। श्रावण कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली सावन शिवरात्रि इस बार 11 अगस्त को मनाई जा रही है। देशभर के शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की कतारें लगेंगी और हर-हर महादेव के जयघोष के बीच भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। कांवड़ यात्रा पर निकले शिवभक्त भी गंगाजल लेकर अपने-अपने आराध्य का अभिषेक करेंगे। सावन शिवरात्रि की रात शिव आराधना, उपवास, मंत्र जाप और रुद्राभिषेक के लिए विशेष मानी जाती है। उत्तर भारत में सावन का महीना 30 जुलाई से शुरू हुआ है और 28 अगस्त तक चलेगा।

शिव आराधना का सबसे पवित्र अवसर

सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और इस पूरे महीने में शिवभक्त सोमवार के व्रत, जलाभिषेक और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। सावन शिवरात्रि इसी साधना का महत्वपूर्ण पड़ाव है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख, शांति तथा समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है। शिवरात्रि की रात जागरण और शिव मंत्रों का जाप भी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।

11 अगस्त को मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि

पंचांग के अनुसार इस वर्ष श्रावण कृष्ण चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4:54 बजे शुरू होगी और 12 अगस्त को रात 1:52 बजे समाप्त होगी। इसी वजह से सावन शिवरात्रि का व्रत और पूजन 11 अगस्त को किया जाएगा। शिवरात्रि की मुख्य पूजा रात में निशीथ काल में की जाती है। अलग-अलग स्थानों पर सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा के समय में थोड़ा अंतर हो सकता है।

निशीथ काल में शिव पूजन का विशेष महत्व

सावन शिवरात्रि पर रात्रि पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार उत्तर भारत के कई क्षेत्रों में निशीथ काल 12 अगस्त की मध्यरात्रि के आसपास रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु शिवलिंग का अभिषेक कर भगवान शिव को बेलपत्र, पुष्प, फल और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। रात को चार प्रहर में शिव पूजा करने की परंपरा भी है। श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य और परंपरा के अनुसार किसी एक प्रहर या चारों प्रहर में पूजा कर सकते हैं।

कांवड़ियों के लिए सबसे बड़ा आस्था पर्व

सावन शिवरात्रि का संबंध कांवड़ यात्रा से भी गहराई से जुड़ा है। हर वर्ष लाखों शिवभक्त विभिन्न तीर्थस्थलों और गंगातटों से पवित्र जल लेकर पैदल अपने क्षेत्रों की ओर लौटते हैं। कांवड़िए कई दिनों की कठिन यात्रा पूरी करने के बाद शिवालयों में पहुंचते हैं और गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान रास्तों में ‘बोल बम’, ‘हर हर महादेव’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारों से वातावरण शिवमय हो जाता है।

गंगाजल से अभिषेक की परंपरा

सावन में भगवान शिव को जल अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु गंगाजल लेकर आते हैं और शिवरात्रि के अवसर पर उसे शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में जलाभिषेक को शिव आराधना का प्रमुख अंग माना गया है। इसके साथ ही दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करने की परंपरा भी कई स्थानों पर प्रचलित है। हालांकि पूजा की विधि अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है।

बेलपत्र और धतूरा चढ़ाने की मान्यता

भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र का विशेष स्थान है। श्रद्धालु शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करते हैं और ‘ॐ नम: शिवाय’ का जाप करते हैं। बेलपत्र के साथ धतूरा, आक के फूल, भस्म और सफेद पुष्प अर्पित करने की परंपरा भी है। शिव पूजा में दिखावे के बजाय श्रद्धा और भाव को अधिक महत्वपूर्ण माना गया है। यही वजह है कि साधारण जल और बेलपत्र के साथ की गई पूजा को भी भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था की अभिव्यक्ति मानते हैं।

व्रत में संयम और सात्विकता पर जोर

सावन शिवरात्रि पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं। व्रत रखने वाले लोग अपनी परंपरा और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या अन्य सात्विक आहार लेते हैं। धार्मिक मान्यताओं में व्रत को केवल भोजन त्यागने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म में संयम रखने का माध्यम माना गया है। श्रद्धालु इस दिन सात्विक जीवनशैली अपनाने, भगवान शिव का ध्यान करने और नकारात्मक विचारों से दूर रहने का प्रयास करते हैं।

‘ॐ नम: शिवाय’ के जाप से शिवालय गूंजेंगे

सावन शिवरात्रि पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन आयोजित किए जाते हैं। कई प्रमुख शिवालयों में रातभर धार्मिक कार्यक्रम चलते हैं। श्रद्धालु शिवलिंग के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते हैं। मंदिरों में ‘ॐ नम: शिवाय’, ‘हर हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष सुनाई देते हैं। शिवभक्तों के लिए यह रात सांसारिक व्यस्तताओं से दूर होकर भगवान शिव की भक्ति में लीन होने का अवसर होती है।

शिवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश

सावन शिवरात्रि केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि यह संयम, साधना और आत्मचिंतन का संदेश भी देती है। भगवान शिव का स्वरूप भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में त्याग, धैर्य, करुणा और समभाव से जोड़ा जाता है। शिव का नीलकंठ स्वरूप यह संदेश देता है कि जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों का सामना धैर्य और संतुलन के साथ किया जाए। यही कारण है कि शिवभक्ति में बाहरी अनुष्ठानों के साथ आंतरिक शुद्धता और सद्भाव को भी महत्व दिया जाता है।

समुद्र मंथन और नीलकंठ की कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब हलाहल विष निकला तो उसकी तीव्रता से देवता और असुर दोनों चिंतित हो गए। संसार की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस विष को अपने कंठ में धारण कर लिया। विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला पड़ गया और वे नीलकंठ कहलाए। शिव से जुड़ी इस कथा को त्याग और लोककल्याण की भावना के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। सावन में जलाभिषेक की परंपरा को भी इसी पौराणिक प्रसंग से जोड़कर देखा जाता है।

शिव-पार्वती की आराधना का पर्व

सावन शिवरात्रि में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की आराधना भी की जाती है। धार्मिक मान्यताओं में शिव और शक्ति को सृष्टि के दो महत्वपूर्ण आधार माना गया है। इसलिए कई श्रद्धालु इस अवसर पर दांपत्य जीवन में सुख-शांति, परिवार की समृद्धि और आपसी प्रेम के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं। अविवाहित कन्याओं द्वारा भी अच्छे जीवनसाथी की कामना से शिव-पार्वती की पूजा किए जाने की परंपरा है।

देशभर में शिवमय होगा वातावरण

सावन शिवरात्रि के अवसर पर उत्तर भारत से लेकर देश के विभिन्न हिस्सों तक शिव मंदिरों में विशेष आयोजन होंगे। काशी, हरिद्वार, उज्जैन, देवघर, प्रयागराज, नासिक और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना रहती है। स्थानीय मंदिरों में भी विशेष सजावट, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन और जागरण का आयोजन किया जाता है। प्रशासन और मंदिर समितियां भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए व्यवस्थाएं करती हैं।

देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दरबार में उमड़ेगी आस्था

झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व है। देश के प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा बैद्यनाथ के दरबार में सावन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कांवड़िए सुल्तानगंज से गंगाजल लेकर करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद देवघर पहुंचते हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं। सावन शिवरात्रि के अवसर पर मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र ‘बोल बम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठता है। श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ को जल, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की कामना करते हैं। देवघर में सावन का यह धार्मिक आयोजन आस्था, कांवड़ यात्रा और शिवभक्ति के विराट संगम के रूप में देखा जाता है।

सावन सोमवार के बाद शिवरात्रि का उत्साह

इस वर्ष उत्तर भारत में सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ा और इसके अगले दिन 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि मनाई जा रही है। इस वजह से लगातार दो दिनों तक शिवभक्ति का विशेष माहौल बना हुआ है। पंचांग के अनुसार उत्तर भारतीय परंपरा में सावन के चार सोमवार 3, 10, 17 और 24 अगस्त को हैं। सावन पूर्णिमा 28 अगस्त को होगी।

भक्ति में आस्था के साथ अनुशासन भी जरूरी

शिवरात्रि के अवसर पर मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में पूजा के साथ व्यवस्था और अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है। कांवड़ यात्रियों के लिए भी यात्रा के दौरान स्वच्छता, यातायात नियमों का पालन और दूसरे श्रद्धालुओं की सुविधा का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है। धार्मिक पर्व तभी व्यापक सामाजिक उत्सव का रूप लेते हैं, जब आस्था के साथ संयम, सहयोग और सद्भाव भी जुड़ा हो।

हर मन में बसे शिव का संदेश

सावन शिवरात्रि का पर्व अंततः भक्त और भगवान के बीच आस्था के उस रिश्ते को मजबूत करता है, जिसमें किसी बड़े अनुष्ठान से अधिक महत्व सच्चे भाव का है। शिव को भोलेनाथ कहा जाता है, क्योंकि भक्तों की मान्यता है कि वे सरल पूजा और निर्मल मन से प्रसन्न हो जाते हैं। सावन शिवरात्रि इसी विश्वास को और गहरा करती है कि जीवन की कठिनाइयों के बीच धैर्य, संयम और करुणा के साथ आगे बढ़ना ही शिवत्व की ओर बढ़ना है। शिवालयों में गूंजता ‘हर हर महादेव’ का जयघोष इसी आस्था, ऊर्जा और लोकमंगल की भावना का प्रतीक बनकर सामने आता है।