लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय    |    BREAKING : बंगाल का नया CM- शुभेंदु अधिकारी होंगे प. बंगाल के नए सीएम- अमित शाह ने किया सीएम का एलान    |    BREAKING NEWS : देखिए लाल किले के पास हुए बम धमाके की खौफनाक तस्वीरें, 8 लोगों की मौत    |    Breaking : 1 नवंबर को सभी स्कूल – कॉलेजों में रहेगी छुट्टी, आदेश जारी    |    BIG BREAKING : सी.पी. राधाकृष्णन होंगे भारत के नए उपराष्ट्रपति    |    साय कैबिनेट की बैठक खत्म, लिए गए कई अहम निर्णय    |    CG Accident : अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराई तेज रफ्तार कार, युवक-युवती की मौके पर ही मौत, 3 की हालत गंभीर    |    Corona Update : छत्तीसगढ़ में फिर डराने लगा कोरोना, इस जिले में एक ही दिन में मिले इतने पॉजिटिव मरीज    |    प्रदेशवासियों को बड़ा झटका, बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी, जाने प्रति युनिट कितने की लगेगी चपत    |    छत्तीसगढ़ में बढ़ा कोरोना का खतरा: 20 दिनों में 3 मौतों के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर    |

शनिवार को पीपल के पेड़ पर छाछ चढ़ाने की मान्यता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व

शनिवार को पीपल के पेड़ पर छाछ चढ़ाने की मान्यता, जानिए क्या है धार्मिक महत्व
Share

 नई दिल्ली। हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को बेहद पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पीपल का संबंध भगवान विष्णु, ब्रह्मा, महेश और शनिदेव से जोड़ा जाता है। इसी वजह से शनिवार के दिन पीपल की पूजा और उससे जुड़े उपायों का विशेष महत्व बताया गया है।धार्मिक परंपराओं में एक उपाय पीपल की जड़ में छाछ या मट्ठा अर्पित करने का भी उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि शनिवार को लगातार सात सप्ताह तक श्रद्धा के साथ यह उपाय करने से शनि से जुड़ी परेशानियों में राहत मिल सकती है। इसे आर्थिक संकट, कर्ज और जीवन में आने वाली बाधाओं से जोड़कर भी देखा जाता है।

क्या है तरीका?
शनिवार सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनने के बाद पीपल के पेड़ के पास जाकर श्रद्धापूर्वक पूजा करने की परंपरा है। इसके बाद पेड़ की जड़ में छाछ अर्पित की जाती है। धार्मिक विश्वास रखने वाले लोग इसे सात शनिवार तक करने की मान्यता बताते हैं।

कहा जाता है कि, इस उपाय से नकारात्मकता दूर होती है, रुके काम बनने लगते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है। हालांकि, इन दावों के वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए इसे धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में ही देखना उचित है। साथ ही पीपल के पेड़ और आसपास की मिट्टी को नुकसान न पहुंचे, इसका ध्यान रखना चाहिए।


Share

Leave a Reply