वाशिंगटन/नई दिल्ली । विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (आईटी) नीति संबंधी मुख्य अमेरिकी थिंक टैंक का कहना है कि अमेरिका उभरते चीन को रोकना चाहता है और ऐसे में उसके लिए भारत के महत्वपूर्ण कोई अन्य देश नहीं है, जिसके पास अत्यंत दक्ष तकनीकी पेशेवर हैं और जिसके अमेरिका के साथ मजबूत राजनीतिक एवं सांस्कृतिक संबंध हैं।
थिंक टैंक `इन्फर्मेशन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन फाउंडेशन` (आईटीआईएफ) ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में यह कहा। उसने अमेरिका को भारत पर ``अत्यधिक निर्भर`` होने को लेकर सचेत करते हुए यह भी कहा कि यदि दोनों देशों के बीच बौद्धिक सम्पदा, डेटा संचालन, शुल्क, कर, स्थानीय विषय वस्तु की आवश्यकताएं या व्यक्तिगत निजता जैसे मामलों पर बड़े मतभेद पैदा होते हैं, तो आईसी सेवा प्रदाता भारत रणनीतिक समस्या बन सकता है।
रिपोर्ट में सबसे खराब और सबसे अच्छे परिदृश्यों पर गौर किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक परिदृश्य यह है कि भारत और चीन के बीच तनाव कम हो और दोनों पड़ोसी देशों के बीच कारोबारी संबंध मजबूत हों।
ऐसी स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था पूर्व दिशा की ओर स्थानांतरित हो जाएगी और अमेरिका इस बारे में कुछ खास नहीं कर पाएगा। रिपोर्ट के अनुसार, दूसरा परिदृश्य यह है कि चीन के कारण आर्थिक, सैन्य और अंतरराष्ट्रीय संबंध से जुड़ी चुनौतियां बढ़ने के बीच भारत और अमेरिका के हित समान हों।
ऐसी स्थिति में अधिकतर विकसित देशों में लोकतांत्रिक नियम कायम रहेंगे, क्योंकि विकासशील देश `बीजिंग मॉडल` के बजाए `दिल्ली मॉडल` को देखेंगे। थिंक टैंक ने कहा, ``अमेरिका उभरते चीन को रोकना चाहता है और ऐसे में, भारत से महत्वपूर्ण कोई अन्य देश नहीं है, जिसका आकार बहुत बड़ा है, जिसके पास अत्यधिक कुशल तकनीकी पेशेवर हैं और जिसके अमेरिका के साथ मजबूत राजनीतिक एवं सांस्कृतिक संबंध हैं।``
आईटीआईएफ के सदस्य एवं रिपोर्ट के सह लेखक डेविड मोशेला ने कहा कि जो ताकतें अमेरिका और चीन के बीच मतभेद बढ़ा रही हैं, वही ताकतें अमेरिका और भारत को निकट ला रही हैं। उन्होंने कहा, ``अमेरिका, भारत और चीन के संबंध आगामी कई वर्षों तक वैश्विक प्रतिद्वंद्वता और डिजिटल नवोन्मेष को आकार देंगे।
व्यापक संभावित परिदृश्य होने के बीच दो बातें स्पष्ट हैं: चीन से मुकाबला करने और उस पर निर्भरता को कम करने के लिए भारत को अमेरिकी प्रयासों का अहम हिस्सा होना चाहिए और इससे अमेरिका की वैश्विक निर्भरताएं विनिर्माण से लेकर सेवा क्षेत्र तक अवश्य बढ़ जाएंगी।``
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत अनुसंधान एवं विकास, नवोन्मेष केंद्रों, मशीनों संबंधी जानकारी, विश्लेषण, उत्पाद के डिजाइन एवं जांच और आईटी एवं जीव विज्ञान समेत विभिन्न क्षेत्रों में अहम प्रगति कर रहा है।
पंजाब सरकार ने हाल ही में केंद्र सरकार से कहा कि वह इस खरीद सत्र को शुरू करने वाले किसानों के खातों में सीधे न्यूनतम समर्थन मूल्य का भुगतान करेगी। हालाँकि, राज्य के आढ़ती प्रत्यक्ष भुगतान का विरोध करते रहे हैं। राज्य में आढ़ती कमीशन एजेंट हैं। पहले वे पंजाब में किसानों को भुगतान करते थे। इस मुद्दे को हल करने के लिए, पंजाब ने अब खरीद सॉफ्टवेयर में संशोधन किया है ताकि आढ़तियों को प्रत्यक्ष भुगतान प्रक्रिया में शामिल किया जा सके।
पंजाब में आढ़तियो और किसानों में मजबूत और सदियों पुराना भरोसा है। हालांकि, सरकार के अनुसार, कई आढ़ती पैसा लूट रहे हैं और आवंटित धन किसानों तक नहीं पहुंचता है।
डायरेक्ट पेमेंट सिस्टम में कैसे शामिल होंगे आढ़ती?
पंजाब राज्य में लगभग 28,000 पंजीकृत आढ़ती हैं। उनमें से प्रत्येक के पास 20 से 200 किसान जुड़े हुए हैं। इससे पहले, किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य भुगतान आढ़तियों के खातों में आता थे। वे फिर किसानों को भुगतान करते थे। अब यह राशि सीधे किसानों के खाते में आएगी। हालाँकि, यह तब होगा जब आढ़ती “pay now” पर क्लिक करेंगे। एमएसपी प्राप्त करने के 48 घंटे के भीतर उन्हें ऐसा करना होगा। यदि वे 48 घंटे के भीतर राशि हस्तांतरित करने में विफल रहते हैं, तो राशि सीधे 72 घंटों में किसानों के खाते में जमा हो जाएगी।
आढ़ती (Arhtiyas)
आढ़ती पंजाब की मंडियों में विभिन्न सेवाएं प्रदान करते हैं। इसमें सरकारी गोदामों में फसल की सफाई, भराई, वजन तोलना और फसल को उतारना शामिल है। इन कार्यों के लिए सरकार उन्हें 2.5% कमीशन देती है।
किए गए बदलाव
पंजाब सरकार ने अनाज खरीद पोर्टल (Anaaj Kharid Portal) को संशोधित किया है। इस पोर्टल पर आढ़तियों को एक संदेश मिलेगा। संदेश उसके साथ जुड़े किसान का नाम प्रदान करेगा, जिसकी राशि हस्तांतरण के लिए तैयार है। संबंधित आढ़ती को पैसे ट्रांसफर करने के लिए “Pay Now” पर क्लिक करना होगा।
भोपाल । मध्य प्रदेश में कोरोना संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। हालात ये हो गए हैं कि कई मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। कई हिस्सों से ऑक्सीजन की कमी के चलते लोगों को परेशानी हो रही है, जिसको ध्यान में रखते हुए अब मध्यप्रदेश सरकार ने फैसला किया है कि वो ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन खरीदेगी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने खुद इसकी जानकारी देते हुए बताया कि मध्यप्रदेश सरकार ने 2 हजार ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन खरीदने का आर्डर दे दिया है। इन मशीनों को आईसीयू वार्ड में रखा जाएगा, जहां गंभीर रूप से पीड़ित कोरोना मरीजों का इलाज होता है। दरअसल, मध्यप्रदेश में बीते कुछ दिनों से रेमडेसिविर इंजेक्शन, ऑक्सीजन सिलेंडर और अस्पतालों में बेड की कमी से सरकार की किरकिरी हो रही थी।
बता दें कि अचानक से कोरोना के मामले बढ़ने से सरकार के सामने भी चुनौती है कि इस कमी को जल्द दूर कैसे किया जाए। एक तरफ तो सरकार इस महीने एक लाख रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदने जा रही है, तो वहीं ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीनों की खरीदी से गंभीर कोरोना पीड़ित मरीजों के इलाज में सहूलियत होगी। ऑक्सीजन कंसंट्रेटर मशीन हवा से सीधे ऑक्सीजन लेकर उसे फिल्टर करती है और उसके बाद कम्प्रेस करने के बाद नली के जरिए सीधे मरीज को ऑक्सीजन दी जाती है, जिससे उसका सेचुरेशन लेवल नीचे न जाए।
वहीं दूसरी तरफ सरकार ने ऑक्सीजन का परिवहन करने वाले टैंकरों को एंबुलेंस घोषित कर दिया है। गृह विभाग ने बकायदा इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। सरकार का उद्देश्य है कि ऑक्सीजन टैंकर बिना देरी के अस्पतालों तक पहुंच सकें, जिससे वहां ऑक्सीजन की आपूर्ति प्रभावित न हो।
भारत ने रूस में कोविड-19 के खिलाफ तैयार वैक्सीन स्पुतनिक-V के आपात इस्तेमाल को लेकर सशर्त मंजूरी दे दी है. देश में लगातार बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के मामलों के बीच सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की सब्जेक्ट एक्सपर्ट कमेटी (SEC) ने इस वैक्सीन के इस्तेमाल को लेकर ये फैसला लिया है. कोविशील्ड और कोवैक्सीन के बाद भारत सरकार की तरफ से यह तीसरी वैक्सीन है, जिसे आपात इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से मंजूरी मिलने के साथ ही ये देश में कोविड-19 खिलाफ इस्तेमाल में आने वाली टेस्सरी वैक्सीन बन जाएगी.
कई राज्यों ने देश में वैक्सीन की कमी को लेकर केंद्र से चिंता जाहिर की थी. ऐसे में स्पुतनिक-V को मिली मंजूरी से देश में वैक्सीन की आपूर्ति दोबारा बढ़ने की उम्मीद है. इससे पहले भारत ने ऑक्सफोर्ड-एस्ट्रेजेनिका की तरफ से तैयार वैक्सीन कोविशील्ड के इस्तेमाल को मंजूरी दी थी. भारत में इसका उत्पादन पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की तरफ से किया जा रहा है. इसके साथ ही, हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक की तरफ से तैयार की गई दवा कोवैक्सीन के आपात इस्तेमाल कर उसे मंजूरी दी गई है. ऐसे में रूसी वैक्सीन स्पुतनिक-V ऐसी तीसरी वैक्सीन है जिसके आपात इस्तेमाल को मंजूरी दी गई है.
स्पुतनिक-V की पांच खास बातें-
• भारत में स्पुतनिक-V की डोज तैयार करने के लिए रशियन डायरेक्ट इनवेस्ट फेंड (RDIF) हैदराबाद की दवा कंपनी डॉक्टर रेड्डी लेबोरेट्रीज समेत कई भारतीय दवा निर्माता कंपनियों के साथ साझेदारी की है. रेड्डी लेबोरेट्रीज के अलावा इस साझेदारी में Hetero Biopharma, Gland Pharma, Stelis Biopharma और Vichrow Biotech शामिल है.
• रूस ने पिछले साल अगस्त में ही इस वैक्सीन के इस्तेमाल को मंजूरी दे दी थी. रूस द्वारा वैक्सीन के बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल करने से पहले ही इसके इस्तेमाल को मंजूरी देने के फैसले की कई विशेषज्ञों ने आलोचना की थी. हालांकि बाद में इस वैक्सीन पर की गयी स्टडी के अनुसार इसे कोविड-19 से लड़ने के लिए पूरी तरह सुरक्षित और असरदार बताया गया है
• रिपोर्ट्स के अनुसार ये वैक्सीन साधारण सर्दी और जुखाम देने वाले human adenoviral vectors को केंद्र में रखकर तैयार की गयी है. दो डोज में लगने वाली ये वैक्सीन दो अलग अलग vectors का इस्तेमाल करती है, जिसके चलते ये हमारी इम्यूनिटी लम्बे समय तक मजबूत बनाए रखती है.
• रूस स्थित Gamaleya Institute द्वारा तैयार स्पुतनिक-V, कोरोना वायरस के खिलाफ 91.6 प्रतिशत तक असरकारक है. इसका परीक्षण रूस में 19,866 लोगों पर किया गया था. स्पुतनिक वेबसाइट के मुताबिक, अंतिम चरण का परीक्षण यूएई, भारत, वेनेजुएला और बेलारूस में किया गया था.
• वैश्विक मार्केट में इस वैक्सीन के प्रत्येक डोज की कीमत लगभग 10 डॉलर है. इसके ड्राई फॉर्म को से2 से 8 डिग्री के तापमान के बीच रखा जाता है. देश में इसकी उत्पादन श्रमता लगभग 850 मिलियन डोज की है. जिसके चलते ये कोविड-19 महामारी के खिलाफ जंग में और तेजी देने का काम करेगी.
ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हाल ही में COVID-19 के प्रसार को रोकने के लिए 14 दिनों का “मास्क अभियान” लांच किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मास्क के उपयोग को एक आदत में बदलना है। यह COVID-19 की वर्तमान वृद्धि को नियंत्रित करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएगा। साथ ही, ओडिशा राज्य सरकार ने उल्लंघनकर्ताओं के लिए जुर्माना 1000 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये कर दिया है। ओडिशा सरकार ने महामारी रोग अधिनियम, 1897 के तहत COVID -19 नियमों में संशोधन भी किया था। तदनुसार, सार्वजनिक स्थानों पर मास्क नहीं पहनने वाले लोगों पर पहली बार उल्लंघन के लिए 2,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जब दूसरी बार उल्लंघन किया जाता है, तो लोगों पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
ओडिशा सरकार ने किन कानूनी आधारों पर जुर्माना लगाया है?
मई 2020 में, केंद्र सरकार ने राज्यों को महामारी रोग अधिनियम लागू करने का निर्देश दिया। यह अधिनियम राज्य सरकारों को एक महामारी के दौरान विशेष उपाय करने का अधिकार देता है। इन प्रावधानों के तहत, ओडिशा सरकार ने जुर्माना पेश किया है।
महामारी अधिनियम, 1897 के प्रावधान
स्वास्थ्य एक राज्य का विषय है।हालाँकि, महामारी अधिनियम की धारा 2A केंद्र सरकार को महामारी के प्रसार को रोकने के लिए कदम उठाने का अधिकार देती है।
अधिनियम की धारा 3 अवज्ञा के लिए दंड का प्रावधान करती है।
अधिनियम की धारा 4 अधिनियम के तहत कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है।
हाल ही में महामारी अधिनियम, 1897 में संशोधन
केंद्र सरकार ने हाल ही में इस अधिनियम में संशोधन करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवा कर्मियों के खिलाफ हिंसा के कार्यों को दंडित किया जाएगा। आरोपी को तीन महीने से पांच साल तक की कैद होगी और 2 लाख रुपये तक जुर्माना लगेगा।
नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर 45 वर्ष से अधिक आयु के केवल ‘प्राथमिकता वाले आयु समूहों’ को कोविड-19 का टीका लगाने के केंद्र के फैसले को चुनौती दी गई है और सभी नागरिकों के लिए इसकी खुराक देने का अनुरोध किया गया है।
राजनीतिक कार्यकर्ता एवं स्तंभकार तहसीन पूनावाला की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि देश में प्रतिदिन सामने आने वाले कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी हुई है और 9 अप्रैल को 1.31 लाख नए मामले सामने आए थे।
इसमें कहा गया है कि इससे सभी आयु समूहों और विशेष रूप से श्वसन बीमारियों जैसी अन्य बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों के लिए कोविड-19 टीकाकरण के लिए अनुमति दिए जाने की आवश्यकता बढ़ गई है, जिन्हें वायरस की चपेट में आने के खतरे बावजूद टीके के जरिये संरक्षण का विकल्प नहीं दिया गया है।
अर्जी में कहा गया है कि कोविड-19 संक्रमण के मामलों में अचानक वृद्धि के बीच आयु-समूहों को लेकर यह मनमानी रोक है। यह सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाना जरूरी हो गया है कि टीका केवल 45 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए ही उपलब्ध नहीं हो बल्कि 45 वर्ष से कम आयु के ऐसे सभी व्यक्तियों के लिए भी उपलब्ध हो, जिन्हें ऐसे काम पर लगाया जाता है जिससे उन्हें हर दिन बाहर जाना पड़ता है और ऐसे उन सभी व्यक्तियों को भी, जो अन्य बीमारियों से पीड़ित हैं।
अर्जी में कहा गया है कि अन्य बीमारियों से पीड़ित होने के बावजूद 45 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को स्वीकृत टीके की उपलब्धता पर रोक मनमानी, अनुचित है, अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है जो जीवन का अधिकार प्रदान करता है, यह अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन है जिसमें सभी नागरिकों के लिए समानता का अधिकार प्रदान किया गया है।
याचिका में देश के सभी नागरिकों को कोविड-19 का टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह अपनी नीति में प्रभावी बदलाव करे।
ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने टीकाकरण के लिए दो टीकों के उपयोग को मंजूरी दी थी - सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) की कोविशील्ड और भारत बायोटेक की कोवैक्सीन। केंद्र ने टीकाकरण की आयु सीमा को कम कर दिया है जिससे एक अप्रैल से 45 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोग टीके ले सकते हैं।
भारत में टीकाकरण के चरणों के तहत अब तक 60 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों, अन्य बीमारियों से पीड़ित 45 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों, चिकित्सा पेशेवरों और अग्रिम मोर्चे पर तैनात कर्मियों को इसमें शामिल किया गया है।
नई दिल्ली। देशभर में बढ़ रहे कोरोना के मामलों के साथ-साथ अब एक और बड़ी खबर सामने आई है। जानकारी मिली है कि सुप्रीम कोर्ट का 50 फीसदी स्टाफ कोरोना से संक्रमित हो गया है। ऐसे में अब सभी न्यायाधीश अपने घर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई करेंगे। वहीं पीठ भी निर्धारित समय से एक घंटा देरी से बैठेंगी। कोरोना के मामलों को देखते हुए कोर्ट रूम सहित पूरे कोर्ट परिसर को सैनेटाइज किया जा रहा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने कोरोना पॉजिटिव कर्मचरियों का कोई आंकड़ा नहीं जारी किया है।
एक जज ने इस मामले में जानकारी दी है। जज ने साफतौर पर कहा है कि मेरा अधिकांश स्टाजफ और क्लजर्क कोरोना संक्रमित हैं। कुछ जज भी पहले कोरोना संक्रमित हुए थे, लेकिन अब वह ठीक हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट जजों को सीधे सेवाएं देने वाले करीब 50 प्रतिशत कर्मचारी अब तक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं। ऐसे में जज आज अपने-अपने घर से मामलों की सुनवाई करेंगे। इसी के साथ बताया गया है कि जिन मामलों की सुनवाई 10.30 बजे शुरू होनी थी वो अब 11.30 बजे होगी वहीं जिन मामलों की सुनवाई 11 बजे होनी थी वो 12 बजे होगी।
उज्जैन। महाकाल मंदिर के पुजारी चंद्र मोहन का कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया है। चंद्र मोहन मार्च में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे, जिसके बाद उन्हें इंदौर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। शनिवार को पुजारी चंद्र मोहन की मौत की खबर आते ही उज्जैन के साथ-साथ महाकाल मंदिर के लोग शोक में डूब गए।
इन दिनों महाकाल की नगरी उज्जैन के महाकाल मंदिर में जहां कोरोना संक्रमण से दुनिया को निजात दिलाने के लिए 11 दिवसीय महामृत्युंजय जाप चल रहा है। यहां 70 से ज्यादा पंडे पुजारी दिन-रात जाप कर रहे हैं। इसी दौरान आई एक बेहद दुखद खबर ने पूरे उज्जैन को दुखी कर दिया है। दरअसल दुनिया भर में प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में कई सालों से है महाकाल की सेवा करने वाले पुजारी चंद्र मोहन काका की मृत्यु कोरोना संक्रमण के चलते हो गई है।
मार्च में संक्रमित हुए चंद्र मोहन पुजारी को इंदौर के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया था शनिवार को की मौत की खबर आते ही उज्जैन के साथ-साथ महाकाल मंदिर के लोग शोक में डूब गए। ऐसे में महामृत्युंजय जाप में शामिल सभी पंडे पुजारियों ने मृतक पुजारी चंद्र मोहन को श्रद्धांजलि दी।अभी महाकाल मंदिर के दो पुजारी कोरोना से संक्रमित है।
महाकाल के सेवक माने जाने वाले चंद्र मोहन के शव को उज्जैन लाया गया लेकिन केंद्र सरकार की गाइड लाइन के मुताबिक शव परिवार को नहीं सौपा गया। शव का अंतिम संस्कार निगमकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों ने चक्र तीर्थ पर किया।
जबलपुर | मध्यप्रदेश के जबलपुर से एक बड़ी खबर आ रही है | खबर मिली है कि कोरोना संक्रमण के बढ़ने के साथ साथ लाइफ सेविंग इंजेक्शन रेमडेसिविर की स्टॉक में कमी हो रही है | बताया जा रहा है कि मेडिकल स्टोर में रेमडेसिविर दवा मिल नहीं रही है । लोग एक मेडिकल से दूसरे मेडिकल में चक्कर लगा रहे हैं। इसी बीच रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी को ले कर एक बड़ी खबर निकल कर सामने आई है। खबर मिली है कि जबलपुर के मढाताल स्थित मुनीश मेडिकल पर रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते रंगे हाथो पकड़ा गया है | जानकारी के अनुसार मेडिकल में एक डोज के 18 हजार तक वसूले जा रहे थे। प्रशासन की टीम ने मेडिकल को सील कर दिया है।
नई दिल्ली, स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ को पत्र लिखा है. स्वास्थ्य सचिव ने केंद्रीय स्वास्थ्य टीमों के जरिए COVID19 टेस्टिंग, अस्पताल के बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवा कार्यबल और टीकाकरण के संबंध में दी गई रिपोर्ट को लेकर इन राज्यों से उपयुक्त सुधारात्मक उपाय करने के लिए कहा है.
Health Secretary Rajesh Bhushan writes to Maharashtra, Punjab and Chhattisgarh over reports submitted by Central Health teams regarding COVID19 testing, hospital infrastructure, healthcare workforce & vaccination, asks the States to take suitable corrective measures
— ANI (@ANI) April 11, 2021
(file photo) pic.twitter.com/LhCXCbjYIx
गौरतलब है कि भारत में कोरोन की दूसरी लहर खतरनाक रूप लेती जा रही है. भारत में कोविड-19 के एक दिन में रिकॉर्ड 1,52,879 नए मामले आने से संक्रमण के मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,33,58,805 हो गई, जबकि देश में वर्तमान में इस बीमारी का इलाज करा रहे लोगों की संख्या महामारी शुरू होने के बाद से पहली बार 11 लाख के आंकड़े के पार चली गई है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के रविवार सुबह आठ बजे तक जारी आंकड़ों के अनुसार, महामारी से एक दिन में 839 लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या 1,69,275 हो गई है. 18 अक्टूबर 2020 के बाद से इस बीमारी से एक दिन में जान गंवाने वाले लोगों की यह सर्वाधिक संख्या है.
मंत्रालय ने बताया कि संक्रमण के मामलों में लगातार 32वें दिन वृद्धि हुई है. देश में अब भी 11,08,087 लोग संक्रमित हैं जो संक्रमण के कुल मामलों का 8.29 प्रतिशत है जबकि स्वस्थ होने वाले लोगों की दर गिरकर 90.44 प्रतिशत रह गई है.
देश में सबसे कम 1,35,926 उपचाराधीन मरीज 12 फरवरी को थे और सबसे अधिक 10,17,754 उपचाराधीन मरीज 18 सितंबर 2020 को थे, लेकिन अब उपचाराधीन मरीजों की संख्या इस आंकड़े से भी आगे निकल गई है. आंकड़ों के अनुसार इस बीमारी को अब तक 1,20,81,443 लोग शिकस्त दे चुके हैं जबकि मृत्यु दर 1.27 प्रतिशत है.
शहडोल में रविवार दोपहर 12.53 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए. भूकंप के दहशत से लोग घरों से बाहर निकल आए. भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.9 थी. हालांकि अभी तक कोई जान माल के नुकसान की खबर नहीं आई है.
An earthquake of magnitude 3.9 on the Richter scale hit Shahdol, Madhya Pradesh at 12:53 pm today: National Centre for Seismology
— ANI (@ANI) April 11, 2021
भोपाल। भोपाल स्थित जेपी अस्पताल में एक युवक की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया। परिजनों का आरोप है कि इलाज में लापरवाही बरती गई। मौत की सूचना मिलते ही पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और पूर्व पार्षद गुड्डू चौहान कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अस्पताल पहुंच गए। यहां नेताओं ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों को जमकर फटकारा।
इस हंगामे के बाद मरीज का इलाज करने वाले डॉ. योगेंद्र श्रीवास्तव ने अपने साथ दुर्व्यवहार का आरोप लगाकर पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि `मरीज बहुत ही गंभीर स्थिति में अस्पताल लाया गया था। उसका सैचुरेशन लेवल 30% था और हमने परिवार को पहले ही बता दिया था कि इनका बचना मुश्किल है। उन्हें बाहर नहीं भेज सकते थे, क्योंकि उनकी स्थिति बेहद नाजुक थी। जब 2 घंटे बाद उनकी मौत हुई तो कुछ बाहरी लोग आए और मेरे साथ दुर्व्यवहार किया, मुझ पर सबके सामने चिल्लाया, जिससे मैं बहुत आहत हूं और मैं ऐसे नौकरी नहीं कर सकता, मैंने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है।`
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा और पूर्व पार्षद गुड्डू चौहान ने आरोप लगाया कि विधायक के अस्पताल में आने के बावजूद कोई स्टाफ उन्हें जानकारी नहीं दे रहा था। पीसी शर्मा ने कहा कि उन्होंने किसी से बदतमीजी नहीं की, लेकिन उनके साथ आए लोगों ने ऊंची आवाज में डॉक्टर से बात जरूर की। उनका गुस्सा जायज था, क्योंकि अस्पताल में कोई जवाब ही देने वाला नहीं था, जो यह बता दे कि मरीज के साथ हुआ क्या था।
वहीं घटना के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट करते हुए घटना की निंदा करते हुए लिखा है कि `हमारे कोरोना योद्धा लगातार अपनी जान दांव पर लगाकर पीड़ित मानवता की सेवा में कार्यरत हैं। मैं स्वयं भी कई बार अपील कर चुका हूं कि हम सभी को एकजुट होकर, राजनीति से ऊपर उठकर इन सभी का सहयोग करना चाहिए और इनका मनोबल बढ़ाना चाहिए, ताकि वे और बेहतर तरीके से समाज की सेवा करें। आज भोपाल के जेपी अस्पताल में जिस प्रकार कुछ लोगों ने डॉक्टर्स और वहां मौजूद स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार किया, हंगामा खड़ा किया, वह बेहद शर्मनाक है। किसी भी व्यक्ति को हमारे डॉक्टर्स के साथ दुर्व्यवहार करने का कोई अधिकार नहीं है।
मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि आज की घटना के कारण जेपी अस्पताल के एक वरिष्ठ चिकित्सक ने अत्यंत व्यथित होकर इस्तीफा तक सौंप दिया है. हम एक सभ्य समाज में रह रहे हैं, इस समय जब साथ मिलकर खड़े होने की ज़रूरत है, ऐसे में हंगामा करना न तो जनहित में है और न ही इससे कोरोना का मुकाबला किया जा सकता है। आज जेपी अस्पताल में जो घटना हुई, ऐसी घटनाओं से दिन और रात कार्यरत हमारे डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और चिकित्सा सेवाओं से जुड़े लोगों का मनोबल गिरता है। मैं पुनः अपील करता हूं, सभी लोग सभ्य और जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें, डॉक्टर्स का मनोबल गिराने की जगह उनका मनोबल बढ़ाएं।`
मुंबई, महाराष्ट्र में बढ़ते कोरोना के मामलों को देखते हुए सीएम उद्धव ठाकरे ने आज सर्वदलीय बैठक की। बैठक में सीएम उद्धव ने कहा कि राज्य में अगर केस कम नहीं हुए तो 21 अप्रैल तक स्थिति बेहद खराब हो जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि ये वक्त लॉकडाउन का है, लॉकडाउन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। दुनिया ने लॉकडाउन को स्वीकार किया है।
बैठक में मौजूद पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर पूर्ण लॉकडाउन लगाया गया तो जनता सड़क पर आ सकती है। उन्होंने कहा कि लोगों को ध्यान में रखकर ही फैसला लेना होगा।
महाराष्ट्र में लागू है वीकेंड लॉकडाउन
महाराष्ट्र के सभी ज़िलों में कोरोना की रोकथाम को लेकर सरकार ने वीकेंड लॉकडाउन लगाया है। वीकेंड पर लगाए गए लॉकडाउन को अब तक उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली है और मुंबई, पुणे, औरंगाबाद तथा नागपुर समेत राज्य के अधिकतर हिस्सों में सड़कें और बाजार सुने पड़े हैं।
बहरहाल, राजधानी मुंबई के कुछ बाजारों समेत राज्य के कुछ स्थानों पर लोगों को एक ही जगह पर बड़ी संख्या में जमा होकर दूरी और अन्य नियमों को तोड़ते देखा गया। राज्य में पहला वीकेंड लॉकडाउन शुक्रवार रात आठ बजे शुरू हुआ और यह सोमवार सुबह सात बजे तक जारी रहेगा।
शुक्रवार का आए करीब 59 हज़ार केस
शुक्रवार को पिछले 24 घंटों में राज्य में 58,993 लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं और 301 मरीजों की मौत हुई। केवल मुंबई में 9,200 लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं और 35 लोगों की मौत हुई है।
भोपाल । मध्य प्रदेश में एक दिन में करीब 5 हजार कोरोना संक्रमित मिलने के बाद इंदौर, जबलपुर, उज्जैन सहित 12 शहरों में लॉकडाउन बढ़ाया गया है। यह निर्णय मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जिलों के क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया। अपर मुख्य सचिव गृह डा. राजेश राजौरा ने बताया कि कोरोना महामारी की रोकथाम के क्रम में बड़वानी, राजगढ़, विदिशा ज़िलों में (शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में) 19 अप्रैल सुबह 6 बजे तक लाॅकडाउन निरंतर रहेगा। इसी तरह बालाघाट, नरसिंहपुर, सिवनी ज़िलों (शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों) और जबलपुर शहर में 12 अप्रैल की रात से 22 अप्रैल की सुबह तक तथा । इंदौर शहर, राऊ नगर, महू नगर, शाजापुर शहर और उज्जैन शहर (एवं उज्जैन ज़िले के सभी नगरों) में 19 अप्रैल सुबह 6 बजे बजे लाॅकडाउन निरंतर रहेगा।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की ज़िला आपदा प्रबंध समितियों के साथ हुई बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। इसको लेकर देर शाम तक आदेश जारी किया जाएगा। बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दिन में 5 हजार केस आना चिंताजनक है।
पर्यटन मंत्रालय श्रीनगर में 11 से 13 अप्रैल तक एक व्यापक पर्यटन संवर्धन कार्यक्रम “कश्मीर की क्षमता का दोहन: स्वर्ग में एक और दिन” का आयोजन कर रहा है। केन्द्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के राज्यपाल, श्री मनोज सिन्हा और केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रहलाद सिंह पटेल इस आयोजन के उद्घाटन सत्र के दौरान प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे। भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय, जम्मू कश्मीर के पर्यटन विभाग, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (फिक्की) और इंडियन गोल्फ टूरिज्म एसोसिएशन (आईजीटीए) के सहयोग से 11 से 13 अप्रैल, 2021 तक इस कार्यक्रम का आयोजन कर रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर के असंख्य पर्यटन उत्पादों के प्रदर्शन के साथ-साथ केन्द्र शासित प्रदेश में साहसिक गतिविधियां, छुट्टियां बिताने, विवाहोत्सव, फिल्म और एमआईसीई पर्यटन के लिए गंतव्य के रूप में जम्मू और कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देना है। पर्यटन मंत्रालय के सचिव श्री अरविंद सिंह और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम के दौरान होने वाले कई महत्वपूर्ण सत्रों में तकनीकी यात्रा, प्रदर्शनियां, वार्तालाप के साथ-साथ भारत के अन्य क्षेत्रों से यात्रा गतिविधियों का संचालन करने वाले संचालकों के लिए एक बी2बी सत्र और आगंतुक प्रतिनिधियों के लिए ट्यूलिप गार्डन में तकनीकी यात्रा के आयोजन के अलावा जम्मू-कश्मीर के यात्रा संचालकों के साथ एक वार्तालाप सत्र होने की भी उम्मीद है। भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय के सचिव (पर्यटन), श्री अरविंद सिंह और जम्मू-कश्मीर सरकार के पर्यटन सचिव श्री सरमद हफीज के साथ-साथ वरिष्ठ सरकारी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा जम्मू और कश्मीर की पर्यटन क्षमता पर विचार-विमर्श के साथ-साथ प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी। 12 अप्रैल, 2021 को होने वाले पूर्ण सत्र के विषयों में चार पैनल चर्चा, ‘पसंदीदा पर्यटन स्थल के रूप में कश्मीर को अगले स्तर पर ले जाना’, ‘कश्मीर को और अधिक प्रभावशाली बनाना’, कश्मीर के विविध पर्यटन उत्पादों को प्रदर्शित करना और वज़वान, ज़ाफ़रान और शिकारा की कहानी जारी है’ के साथ-साथ मास्टर शेफ पंकज भदौरिया के साथ एक चाय पे चर्चा भी की जाएगी। जम्मू और कश्मीर सरकार का पर्यटन विभाग एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद प्रसिद्ध डल झील पर एक लेजर शो का आयोजन करेगा। केन्या, वियतनाम और जॉर्जिया के राजनयिकों सहित अन्य महत्वपूर्ण देशों से आमंत्रित मेहमानों के लिए श्रीनगर के मनोहर रॉयल स्प्रिंग्स गोल्फ कोर्स में एक गोल्फ टूर्नामेंट का भी आयोजन किया जा रहा है।
देश में वैक्सीन की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ गई है. यहां तक कि कई राज्यों ने वैक्सीन की कमी की शिकायत केंद्र सरकार से की है. इस पर राजनीति भी हो रही है. देश में वैक्सीन सेंटर पर लंबी-लंबी कतारें भी देखने को मिल रही है. सरकार और वैक्सीन निर्माताओं पर वैक्सीन प्रोडक्शन का दबाव बढ़ गया है. हालांकि सूत्रों की मानें तो इस बात के संकेत हैं कि वैक्सीन का प्रोडक्शन कुछ और सप्ताह तक नहीं बढ़ाया जाएगा. वर्तमान में वैक्सीन का प्रोडक्शन सीमित ही रहेगा. उम्मीद है कि अगले महीने से सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक वैक्सीन निर्माण की अपनी क्षमता को बढ़ाएं.
सीरम इंस्टीट्यूट में सबसे अधिक प्रोडक्शन
सीरम इंस्टीट्यूट की वर्तमान क्षमता एक महीने में 6 से 8 करोड डोज वैक्सीन निर्माण की है. सीरम इंस्टीट्यूट को जनवरी-फरवरी 2021 से ही 10 करोड़ वैक्सीन प्रति महीने बनाने का लक्ष्य दिया गया था लेकिन अब तक इसका उत्पादन इस लक्ष्य तक नहीं पहुंचा है. संभावना है कि अगले महीने से सीरम इंस्टीट्यूट 10 करोड़ वैक्सीन बनाने लगे. सीरम इंस्टीट्यूट अब तक घरेलू इस्तेमाल के लिए 10 करोड़ डोज सप्लाई कर चुका है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में अगस्त तक 47 करोड़ डोज वैक्सीन की जरूरत पडेगी. सरकार सीरम इंस्टीट्यूट से इसका बड़ा हिस्सा सीरम को ही ऑर्डर देगी.
50 करोड़ सालाना वैक्सीन बनाएगा भारत बायोटेक
सीरम की तरह भारत बायोटेक भी अपने उत्पादन को दोगुना करना चाहता है. फिलहाल वह वैक्सीन की 2 लाख डोज रोजाना बनाता है जिसे अगले महीने तक 5 लाख करने की योजना है. इसके लिए बेंगलुरु संयंत्र में बहुत बड़ा बायो रिएक्टर लगाया गया है. इसकी क्षमता सालाना 20 करोड़ वैक्सीन बनाने की होगी. इस साल के अंत तक भारत बायोटेक हैदराबाद और बेंगलुरु में इस तरह के चार और संयंत्र लगाने की योजना बना रहा है, जिसकी सालाना क्षमता तब 70 करोड़ हो जाएगी. कंपनी के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी इस साल के अंत तक 50 करोड़ सालाना वैक्सीन उत्पादन के अपने लक्ष्य को पा लेगा.
हुगली के चुंचुरा सीट से बीजपी की उम्मीदवार की गाड़ी पर स्थानीय लोगों ने हमला किया है. लॉकेट को हाथ में चोट लगी है. हमले का आरोप टीएमसी समर्थकों पर लगा है. इसके अलावा चुनाव को कवर कर रहे मीडिया की गाड़ियों का भी शीशा तोड़ा गया है.
#WATCH BJP leader Locket Chatterjee's car attacked by locals in Hoogly during the fourth phase of West Bengal assembly elections #WestBengal pic.twitter.com/aQAgzWI94v
— ANI (@ANI) April 10, 2021
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नई दिल्ली: सीबीआई के एक अधिकारी ने सिनेमाई अंदाज में मुंबई की सड़कों पर एक किलोमीटर से अधिक दूरी तक पीछा करने के बाद आयकर विभाग के अधिकारी आशीष कुमार को गिरफ्तार कर लिया. आयकर अधिकारी रिश्वत में लिए गए पांच लाख रुपये छोड़कर भाग रहा था. अधिकारियों के अनुसार यह घटना गुरुवार रात करीब 10 बजे गोरेगांव पूर्व में हुयी. सीबीआई टीम को शिकायत मिली थी कि आशीष कुमार और आयकर के दो अन्य निरीक्षकों - दिलीप कुमार तथा एसएन राय - ने एक व्यक्ति से 15 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी जिसके यहां हाल ही में आयकर विभाग ने छापा मारा था. इस शिकायत के बाद सीबीआई ने जाल बिछाया. अधिकारियों ने बताया कि तीनों आरोपी आयकर के बैलार्ड पियर कार्यालय में तैनात हैं और वे अलग-अलग रिश्वत की मांग कर रहे थे ताकि उसके मामले को रफादफा किया जा सके. सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, आशीष कुमार और शिकायतकर्ता ने सहमति जतायी थी कि रिश्वत की राशि का भुगतान गोरेगांव के डिंडौसी फायर स्टेशन के सामने एक कार में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि कल रात कुमार जैसे ही पैसे लेकर कार से बाहर निकला, उसने सीबीआई अधिकारियों को अपनी ओर आते देखा. इसके बाद उसने रुपये से भरा बैग वहीं फेंक दिया और भागने लगा. अधिकारियों के अनुसार सीबीआई कर्मी विनीत जैन ने ट्रैफिक के बीच खदेड़ कर आशीष कुमार को पकड़ लिया. एक अन्य आयकर निरीक्षक दिलीप कुमार को भी शिकायतकर्ता से 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया गया. तीसरे आरोपी एस एन राय के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया गया है, लेकिन अभी तक वह गिरफ्तार नहीं हुआ है. इस बीच सीबीआई प्रवक्ता आर सी जोशी ने कहा कि मुंबई में दो और दिल्ली में एक स्थान पर आरोपियों के आवासीय और कार्यालय परिसर की तलाशी ली जा रही है. इस दौरान सात लाख रुपये नकद और संपत्ति में निवेश से संबंधित दस्तावेज बरामद हुए हैं.
नईदिल्ली। वैज्ञानिकों ने पाया है कि हिमालय एकरूप नहीं है और उनका अनुमान है कि विभिन्न दिशाओं में विभिन्न भौतिक एवं यांत्रिकी गुण हैं क्रिस्टल में उपस्थित एक गुण को एनिसोट्रोपी कहा जाता है जिसका परिणाम हिमालय में उल्लेखनीय रूप से बड़ी भूकंपीय घटनाओं के रूप में सामने आ सकता है। गढ़वाल और हिमाचल प्रदेश को कवर करने वाले भारत के उत्तरी पश्चिमी क्षेत्र में 20वीं सदी के आरंभ से मध्यम श्रेणी से बड़े तक चार विध्वंसक भूकंप आ चुके हैं- 1905 में कांगड़ा में आया भूकंप, 1975 का किन्नौर भूकंप, 1991 का उत्तरकाशी भूकंप और 1999 में चमोली में आया भूकंप। ये भूकंपीय गतिविधियां बड़े पैमाने पर उपसतही विरूपण तथा कमजोर जोन को दर्शाती हैं और संरचना के लिहाज से इन अस्थिर जोन के नीचे वर्तमान में जारी विरूपण की तह में जाने की आवश्यकता रेखांकित करती हैं। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत एक स्वायत्तशासी संस्थान, देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जिओलॉजी (डब्ल्यूआईएचजी) तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर (आईआईटी केजीपी) के शोधकर्ताओं जिनके नाम हैं, डॉ. सुशील कुमार, वैज्ञानिक ‘जी’, डब्ल्यूआईएचजी; शुभस्मिता बिस्वाल, शोधकर्ता, डब्ल्यूआईएचजी तथा आईआईटी केजीपी; विलियम मोहंती, प्रोफेसर आईआईटी केजीपी एवं महेश प्रसाद परिजा, पूर्व शोधकर्ता, डब्ल्यूआईएचजी ने यह प्रदर्शित करने के लिए कि उत्तर पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र क्रिस्टल में उपस्थित एक विशिष्ट अभिलक्षण प्रदर्शित करते हैं, डब्ल्यूआईएचजी डेटा का उपयोग किया। पश्चिमी हिमालय में तैनात 20 ब्रॉडबैंड भूकंपीय केन्द्रों द्वारा रिकॉर्ड किए गए 167 भूकंपों की भूकंपीय तरंगों का उपयोग करते हुए संयुक्त अध्ययन में इसका संकेत मिला कि एनिसोट्रोपी का बड़ा योगदान मुख्य रूप से इसलिए है कि इंडो-यूरोशिया टकराव (जो 50 मिलियन वर्षों से जारी है) से प्रेरित दबाव तथा टकराव के कारण आई विरूपता ऊपरी आवरण की तुलना में परत में बड़ी पाई जाती है। हाल ही में 2020 में ‘लिथोस्फेयर(जीएसए)’ जर्नल में यह प्रकाशित किया गया है।
हिमालय के साथ-साथ इनहोमोजेनेटी दबाव दर को प्रभावित करती है जो मेन हिमालयन थ्रस्ट (एमएचटी) सिस्टम की जियोमिट्री में परिवर्तन के कारण है और यह भूकंप के दौरान फूटन (रप्चर) आकार को नियंत्रित करता है। हिमालय के भौतिक एवं यांत्रिक गुणों में समानता की यह कमी हिमालयी पहाड़ के निर्माण में शामिल हिमालय-तिब्बत क्रस्टल बेल्ट में हो रही विरूपताओं के बारे में नई संभावनाओं की खोज में मदद कर सकती है।
मुंबई । वैक्सीन की कमी के बीच शुक्रवार को भी मुंबई के 50 टीकाकरण केंद्र बंद रहेंगे। इसके अलावा, सीमित स्टॉक होने के कारण, कुछ वैसे केंद्रों को भी बंद करना पड़ सकता है, जहां टीके दिए जा रहे हैं। आपको बता दें कि आज मुंबई में प्रभावी रूप से 69 टीकाकरण केंद्रों पर वैक्सीन दी जा रही है। मुंबई में कुल 120 टीकाकरण केंद्र हैं, जिसका प्रतिदिन 200 से अधिक सत्रों में संचालन होता है। शुक्रवार को बंद रहने वाले टीकाकरण केंद्रों में बीकेसी जंबो कोविड सुविधा, दहिसर जंबो सुविधा, कूपर अस्पताल, कस्तूरबा अस्पताल, सेवन हिल्स अस्पताल, सायन अस्पताल, वी. एन. देसाई अस्पताल, भट्टी अस्पताल और ब्रीच कैंडी अस्पताल शामिल हैं। शुक्रवार को बंद किए गए 51 वैक्सीन केंद्रों की सूची के साथ, जी/उत्तर वार्ड के सहायक आयुक्त किरण दिघावकर ने गुरुवार देर रात ट्वीट किया, `टीकाकरण केंद्र जो 9 अप्रैल को मुंबई में चालू होंगे। हालांकि, सीमित स्टॉक के कारण यह जल्दी बंद हो सकता है। कुछ केंद्रों को स्टॉक से बाहर घोषित किया जाएगा।` दिघवकर ने कहा कि सभी केंद्र जल्द से जल्द पूरी क्षमता से काम शुरू करेंगे। नगर आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने मंगलवार को कहा, `हम टीकों की कमी का सामना कर रहे हैं और अतिरिक्त खुराक के लिए लगातार केंद्र सरकार के संपर्क में हैं।` गुरुवार शाम को बीएमसी ने घोषणा की कि गुरुवार सुबह तक बची हुई 1,03,320 खुराक की लगभग 50,000 खुराकें गुरुवार के दिन उपयोग की गईं। शेष शुक्रवार के लिए उपलब्ध थे। बीएमसी ने गुरुवार शाम कहा, `बीएमसी के पास स्टॉक में 148,130 टीके थे, जिनमें से 44,810 खुराक दूसरी खुराक के लिए रखी गई हैं। शेष 103,320 गुरुवार को उपलब्ध थे, जिनमें से गुरुवार को 50,000 का इस्तेमाल किए गए थे।` गुरुवार को, बीएमसी ने इन केंद्रों पर कुल 56,909 लाभार्थियों का टीकाकरण किया, जिनमें से 51,433 ने अपनी पहली खुराक प्राप्त की और 5476 ने अपनी दूसरी खुराक। गुरुवार तक कुल 1,402,783 लाभार्थियों को उनकी पहली वैक्सीन खुराक दी गई है और 177,944 लाभार्थियों को उनकी दूसरी वैक्सीन की खुराक दी गई है।














